अजमेर.
अंजुमन सैयदजादगान के चुनाव में दोनों गुटों पर अदालत के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए तीसरा मोर्चा ने रविवार रात को चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर दी। तीसरा मोर्चा के सदस्यों ने निवर्तमान सदर सैयद गुलाम किबरिया व पूर्व सचिव वाहिद अंगारा शाह पर मतपत्रों में पार्टी व उम्मीदवार की पहचान जाहिर करने का आरोप लगाते हुए यह कदम उठाया।
तीसरा मोर्चा के संस्थापक सदस्य सैयद एनुद्दीन चिश्ती व अनवर चिश्ती ने कहा कि अदालत ने निष्पक्ष और बिना दबाव के चुनाव कराने के आदेश दिए थे। किसी दल और उम्मीदवारों की पहचान जाहिर किए बिना मतपत्र प्रकाशित करवाने की भी हिदायत दी, लेकिन निवर्तमान सदर किबरिया व पूर्व सचिव अंगारा खेमे ने मतपत्रों पर लगाए जाने वाले फोटो में अपनी पहचान जाहिर कर दी। इसे देखते हुए उन्होंने चुनाव बहिष्कार का निर्णय किया है। तीसरा मोर्चा के सभी 11 सदस्य चुनाव नहीं लड़ेंगे।
इसलिए बने ऐसे हालात
चिश्तिया हॉल में फोटो जमा कराने के आखिरी दिन किबरिया व वाहिद खेमे के साथ ही तीसरा मोर्चा के उम्मीदवार भी अपने फोटो जमा कराने पहुंचे। यहां जब फोटो देखे गए तो वाहिद गुट के सदस्यों ने गले में हरे रंग का गमछा डाल कर खिंचवाए फोटो लगाए।
किबरिया गुट के भी अधिकतर उम्मीदवारों ने पीले रंग के गमछे गले में डालकर खिंचवाए फोटो निर्वाचन अधिकारी किशनगुर्जर को पेश किए। मौके पर उपस्थित तीसरा मोर्चा के संस्थापक सदस्य सैयद एनुद्दीन चिश्ती ने दोनों दलों द्वारा अपनी पहचान जाहिर करने का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि अदालत ने पहचान छिपा कर चुनाव कराने का आदेश दिया था। इस बात को लेकर काफी देर तक हंगामा होता रहा। दोनों दलों के सदस्यों ने कहा कि यह कहीं नहीं लिखा है कि फोटो किस तरह के कपड़े पहन कर खिंचवाए जाएं। तीसरा मोर्चा के विरोध को देखते हुए निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि चुनाव में तो प्रत्याशियों को समानता बताने वाला चिह्न् लगाने की इजाजत दी जाती है, लेकिन भविष्य में ऐसा कुछ नहीं होगा।
मिलीभगत का आरोप
तीसरा मोर्चा के संस्थापक सदस्य चिश्ती ने अरोप लगाया कि दोनों पार्टियों पर मिलीभगत कर पहचान प्रकट करने वाले निशान मतपत्र में छपवाने का प्रयास किया है।
तीसरा मोर्चा चुनाव का बहिष्कार करता है, यह उनका फैसला है। अदालत ने जो आदेश दिए, उनकी पूरी पालना की गई। कौम के भी कुछ दस्तूर हैं। गले में अंगोछा पहनना हमारी पहचान है। इसे खुद्दाम-ए-ख्वाजा कैसे छोड़ सकते हैं।
-सैयद जियाउद्दीन चिश्ती, इलेक्शन कन्वीनर
अदालत ने ओपन वोट बंद करने, उम्मीदवारों के नाम वर्णमाला के अनुसार तय करने और पोलिंग एजेंटों को निश्चित दूरी पर बैठाने के आदेश दिए थे। सभी आदेशों का पालन किया गया। फैसले में यह कहीं नहीं लिखा कि गमछा नहीं डालो। दो दिन पूर्व हुई बैठक में सभी प्रत्याशियों ने सामूहिकरूप से निर्णय किया था कि मतपत्र पर उम्मीदवारों के फोटो लगाने चाहिए। इसी आधार पर फोटो दिए गए। निर्वाचन अधिकारी और इलेक्शन कन्वीनर के साथ हुई बैठक में इस निर्णय पर सब सहमत थे तो अब विरोध क्यों।
-सैयद मुनव्वर चिश्ती, सदस्य किबरिया खेमा