भोपाल. ये तो तीन ही केस हैं। पुलिस के पास हर तीसरे मोबाइल उपयोगकर्ता के पास इस तरह के फोन आ रहे हैं। टेली मार्केटिंग कंपनियां आपके मोबाइल या लैंडलाइन फोन पर फोन कर उत्पाद बेचने का प्रयास करती हैं। सवाल यह है कि इन कंपनियों को आपके नाम और व्यवसाय की जानकारी कहां से मिलती है? खास तौर से बीमा और फाइनेंस कंपनियां इसका ज्यादा इस्तेमाल करती हैं।
लैंडलाइन पर भी आते हैं फोन
मोबाइल पर कमर्शियल कॉल को लेकर दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा शिकंजा कसने के बाद इन कंपनियों ने लैंडलाइन फोन को भी मार्केटिंग का साधन बना लिया है। तभी तो उपभोक्ता लैंडलाइन पर फोन आने की शिकायत कर रहे हैं।
टेलीकॉम कंपनियों का दावा : हम नहीं देते जानकारी
रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर ने थाने में शिकायत दर्ज कराकर आशंका जताई कि मोबाइल कंपनी ने ही उनका नंबर व अन्य जानकारी फाइनेंस कंपनी को दी है। वहीं टेलीकॉम कंपनियों के अधिकारी दावा करते हैं कि जानकारियां हम लीक नहीं करते। बीएसएनएल, भोपाल के दूरसंचार महाप्रबंधक महेश शुक्ला के अनुसार मोबाइल नंबर की जानकारी उनके यहां से बाहर नहीं जा सकती।
लैंडलाइन नंबरों के मामलों में उन्हें शिकायत मिली थी कि कुछ फाइनेंस कंपनियां डायरेक्टरी के आधार पर लोगों को फोन करके उपहार का लालच दे रहीं हैं। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अखबारों के माध्यम से लोगों से सतर्क रहने की अपील की थी। एयरटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील गोयल के अनुसार तकनीकी तौर पर इतने सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं कि कर्मचारी जानकारी बाहर देने का सोच भी नहीं सकते। कुछ ऐसा ही दावा आइडिया व रिलायंस कंपनी के अधिकारियों का भी है।
रजिस्ट्रेशन में रुचि नहीं
कमर्शियल कॉल और एसएमएस से को रोकने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने में उपभोक्ताओं की रुचि नजर नहीं आती। मप्र के एक करोड़ दस लाख मोबाइल उपभोक्ताओं में से बमुश्किल 55 हजार ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके विपरीत देशभर की 14750 कंपनियों ने प्रोमो एसएमएस और कॉल करने के लिए साढ़े चार लाख नंबर बुक कराए हैं।
ट्राई के नियमानुसार डू नॉट डिस्टर्ब में रजिस्ट्रेशन कराने वाले उपभोक्ताओं को कमर्शियल कॉल या एसएमएस करने पर संबंधित कंपनी को एक हजार रुपए प्रति उपभोक्ता का जुर्माना देना होगा। कंपनी की फोन सुविधा भी छीन सकती है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को उस कंपनी को शिकायत करना होगी जिसका वह मोबाइल इस्तेमाल कर रहा है।