गुना. एड्स से घबराकर मानसिक संतुलन खो देने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। एड्स मरीजों को एआरटी (एंटी र्रिटोवायरल थैरेपी)की दवाएं राहत दे रही हैं। स्थिति यह है कि मौत के करीब पहुंच चुके मरीज अब इन दवाओं से तंदुरुस्त होकर काम पर लौट रहे हैं। गुना जिले में ही ऐसे डेढ़ दर्जन एड्स मरीज हैं, जो इलाज के बाद अब अपने आप को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।
गुना निवासी एक 43 वर्षीय ठेकेदार को जब मालूम चला कि वह एड्स पीड़ित है तो अपना मानसिक संतुलन खो बैठा, लेकिन एआरटी केंद्र इंदौर से दवाएं लेने के बाद अब पूरी तरह तंदुरुस्त होकर ठेकेदारी का काम संभाल रहा है। एक 32 वर्षीय गृहणी तो एड्स के सदमें से दो माह तक आईसीयू में भर्ती रही।
लेकिन अब तंदुरुस्त होकर घर के सभी काम निपटा रही है। एड्स पीड़ित 36 वर्षीय एक ट्रक ड्राइवर को हमेशा बुखार रहता था और कमजोर इतना हो गया था कि चंद कदम चलने पर ही सांस फूल जाती थी। नि:शुल्क एआरटी दवाएं लेने के बाद अब स्वस्थ होकर ड्राइवरी कर रहा है।
कैसे मिलती है एआरटी की सुविधा
जिला एड्स नियंत्रण सोसाइटी के नोडल अधिकारी डा. राजेंद्र भाटी ने बताया कि सभी व्यक्ति अपने नजदीक के आईसीटीसी में जाकर एड्स के बारे में जानकारी लेकर नि:शुल्क जांच करा सकते हैं। यदि मरीज एचआईवी पाजीटिव मिलता है तो उसे एआरटी सेंटर भेज दिया जाता है, जहां से उसे मुफ्त दवाएं दी जाती हैं। पूरे प्रदेश में सिर्फ दो एआरटी सेंटर इंदौर और जबलपुर में हैं, जबकि मध्यप्रदेश में 48 एकीकृत सलाह एवं जांच केंद्र (आईसीटीसी) हैं, जिनमें से ज्यादातर जिला अस्पतालों में हैं। एड्स काउंसलर शैली राय ने बताया कि एआरटी दवाओं से मरीज स्वस्थ हो रहे हैं। यह दवाएं रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं को मजबूत बनाती हैं।
गुना में अब तक मिले 33 मरीज: गुना आईसीटीसी में अभी तक 33 एचआईवी पाजीटिव मरीज मिल चुके हैं, जिनमें 22 पुरुष और 11 महिलाएं शामिल हैं। मार्च 07 से अभी तक 11 माह में ही 12 एचआईवी पाजीटिव व्यक्ति मिले हैं।