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सवर्ण गरीबों को भी देंगे आरक्षण

भोपाल. b बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि न तो वे अवसरवादी हैं और न ही दूसरे दलित नेताओं की तरह बिकाऊ। वे जो कहती हैं उसे करके भी दिखाती हैं। उत्तरप्रदेश की तर्ज पर पूरे देश में गरीबों के हितों को महत्व देने के लिए अगले चुनाव में मध्यप्रदेश सहित केंद्र में बसपा की सरकार बनना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपर कास्ट के गरीबों के साथ धर्म बदलने वाले दलितों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा। कांग्रेस को बसपा विरोधी करार देते हुए उन्होंने कहा उप्र विधानसभा के नौ मार्च को समाप्त हो रहे बजट सत्र के बाद केंद्र सरकार से समर्थन वापसी पर फैसला किया जाएगा।

सुश्री मायावती रविवार को राजधानी के लाल परेड मैदान पर बसपा की सर्व समाज भाईचारा बनाओ महारैली को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा, वे केंद्र में बसपा की सरकार बनाने के साथ सर्व समाज को जोड़कर समता मूलक समाज की स्थापना करना चाहती हैं। यह लक्ष्य अपर कास्ट के समर्थन बिना संभव नहीं है।

उन्होंने स्वयं को गरीबों का हितैषी बताया तथा कहा कि कांग्रेस - भाजपा समेत दूसरी पर्टियां पूंजीपतियों के हितों का ध्यान रख नीतियां बनाती हैं। मायावती ने कहा कि भाजपा की तरह कांग्रेस भी ताज कारीडोर प्रकरण को दोबारा खोलकर उन्हें (माया को) जेल में डालने की कोशिश कर रही है। माया ने इसे उन पर दबाव बनाने की साजिश भी बताया। उन्होंने कहा ‘यदि मुझे जेल हुई भी तो पार्टी का जनाधार और बढ़ जाएगा।’

बसपा सुप्रीमो ने कांग्रेस पर उनके माता-पिता को परेशान करने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसा करने वालों को इस दर्द का अहसास तब ही होगा जब उनके साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया जाएगा। अपनी हत्या की आशंका जताते हुए मायावती ने कहा कि विरोधी उनकी लोकप्रियता से डर गए हैं। बसपा नेत्री का कार्यकर्ताओं से कहना था ‘ऐसे में यदि मेरी हत्या होती है तो कांग्रेस उसकी जिम्मेदार होगी। इसका आप लोग कांग्रेस से सूद सहित बदला लेना।’

यह भी कहा

- कांग्रेस का दलित महापुरुषों तथा नेताओं के प्रति रवैया ठीक नहीं रहा। कांग्रेस से परेशान हो कर डा. भीमराव अंबेडकर ने भी अपने समर्थकों को सलाह दी थी कि वे कांग्रेस के चवन्नी के सदस्य भी नहीं बनें।

पहली और आखिरी पार्टी

मायावती के अलावा सभा को संबोधित करने वाले बसपा के एकमात्र नेता सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि बसपा में सवर्णे को भी महत्व मिलता है और मैं इसका प्रमाण हूं। उन्होंने बसपा को अपनी पहली और आखिरी पार्टी निरूपित किया।

चुनावी वादे

- अगड़ी जाति के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण
- गरीब दलित बेरोजगारों को तीन-तीन एकड़ कृषि भूमि
- धर्म परिवर्तित दलितों को भी आरक्षण
- प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण
- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में 365 दिन काम
- शहरी बेरोजगार को रोजगार देने नई नीति
- दलित छात्रों की छात्रवृत्ति दो गुनी
- दलित आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनने के लिए फ्री कोचिंग





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