HomeNewsMetrosChandigarh Chandigarh

पहली बार पल्सलेस की सफल सर्जरी

चंडीगढ़.हार्ट रोगों की जटिल सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ. हरिंदर बाली ने सर्जरी के क्षेत्र में पूरे विश्व में पहली बार पल्सलेस बीमारी से पीड़ित एक 17 वर्षीय लड़की अनिल कुमारी के दिमाग और सिर को ब्लड की सप्लाई बहाल कर उसे पूरी तरह स्वस्थ बनाने का दावा किया है। पल्सलेस बीमारी को मेडिकल साइंस में टांकिआसु आरर्टीज के नाम से जाना जाता है।

डॉ. हरिंदर बाली इस समय फोर्टिस अस्पताल में डायरेक्टर कार्डियोलॉजी हैं और वे पांच हजार से ज्यादा हार्ट एंजियोप्लास्टी कर चुके हैं। वे रविवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

क्या थी बीमारी

डॉ. बाली ने बताया कि एंजियोग्राफी से पता लगाया कि अनिल कुमारी के दिल से दिमाग और सिर के सभी अंगों को ब्लड की सप्लाई देने वाली चार रक्त धमनियां बंद हो चुकी हैं। लेफ्ट कमान आर्टरी, राइट कमान आर्टरी, लेफ्ट स्वकलेवेन आर्टरी और राइट स्वकलेवेन आर्टरी - चारों धमनियां दिल की मुख्य रक्त धमनी एओर्टा से निकल कर गर्दन और रीढ़ की हड्डी के साथ होती हुई सिर में सर्कल ऑफ विलीज में जाकर एक हो जाती हैं।

तीन आर्टरी बंद होने पर, एक आर्टरी भी ब्लड की सप्लाई जारी रखती है, लेकिन अनिल कुमारी की चारों रक्त धमनियां बंद हो चुकी थीं। इनके आसपास की छोटी नसों के सहारे ही वह जिंदा थी, पर्याप्त ब्लड सप्लाई न होने से वह बेहोश हो जाती थी और आंखों की रोशनी भी चली जाती थी।

कैसे की एंजियोग्राफी

डॉ. बाली ने बताया कि अनिल कुमारी की पूरी तरह से बंद पड़ी लेफ्ट कॉमन आर्टरी को चार स्टैंट डाल कर खोला गया। यह रुकावट 110 मिमि. लंबी थी। इस जटिल सर्जरी को अंजाम देने में उन्हें व उनकी टीम को तीन घंटे लगे। लेफ्ट कारोटिड आर्टरी को स्टेइंग के जरिए खोलने का निर्णय लिया गया, क्योंकि इससे सर्कल ऑफ विलीज तक ब्लड की सप्लाई बहाल होने तक राइट कॉमन आर्टी और अन्य नसों में भी ब्लड की सप्लाई बेहतर होने की संभावना नजर आई। पेट के नीचे के हिस्से से 0.014 इंच कोरोनरी गाइड वायर को बंद पड़ी आर्टरी में प्रवेश कराया गया। बैलून एंजियोप्लासिटी से 2 एमएम और 3 एमएम के बैलून्स से बंद पड़ी लेफ्ट आर्टरी को खोलते हुए ऊपरी हिस्से से चार सटंट डाले। एक के बाद एक चार सटंट डाले गए।

पहले भी कर चुके हैं अनिल की एंजियोग्राफ

गौरतलब है कि पटना निवासी अनिल कुमारी के परिजनों ने देश के सभी प्रमुख अस्पतालों में इस बीमारी के इलाज के लिए पहुंच की थी, लेकिन निराशा मिली। तब उन्होंने डॉ. बाली से संपर्क किया। डॉ. बाली ने ही वर्ष 1997 में टांकिआसु आरर्टीज से पीड़ित अनिल कुमारी के सिर को ब्लड की सप्लाई देने वाली एक रक्त धमनी को कारोटिड आरर्टी सटंट सर्जरी से खोला था। उस समय डॉ. बाली पीजीआई चंडीगढ़ में थे। उस समय सात वर्षीय अनिल सबसे कम आयु की मरीज थी। इस बार 17 वर्षीय अनिल के सिर और दिमाग को ब्लड सप्लाई देने वाली आरर्टीज को चार सटंट डालकर 110 मिमि. खोलकर डॉ. बाली ने अपने पहले बनाए रिकॉर्ड को तोड़ दिया।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: