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नारी समिति चलाती थी नक्सली महिला

रायपुर.raipur नक्सलियों ने समाजसेवा के जरिए गरीबों को अपने प्रभाव में लेकर नेटवर्क फैलाया। शांतिप्रिया ने कुम्हारी में गरीब महिलाओं को अगरबत्ती बनाना सिखाया, फिर इसे बेचने की तरकीब बताई और धीरे-धीरे उन्हें विश्वास में ले लिया। उसने सुरेंद्र की पत्नी को पहले सैट किया। फिर क्या था, सुरेंद्र का मकान नक्सली धमाकों का सामान छिपाने का अड्डा बन गया। पुलिस ने 3 फरवरी को सुरेंद्र के कुम्हारी स्थित घर पर छापा मारकर पुलिस ने तीन सौ से ज्यादा डेटोनेटर, फ्यूज वायर और दो बैटरियां बरामद की थीं।

अफसर बताते हैं कि शांतिप्रिया का कथित पति विजय रेड्डी उर्फ गुडसा उसेंडी शहरों में नक्सली विचारधारा के प्रचार का नेटवर्क अलग अंदाज में चला रहा था। उसने न केवल कुछ संगठनों को मुहिम से जोड़ दिया, बल्कि अपने गुर्गे कुछ संस्थाओं में घुसपैठ करा दी। कुछ संस्थाओं के संस्थापकों को भी नहीं पता था कि उनके यहां नक्सली विचारधारा वाले लोगों की घुसपैठ हो गई।

यह नेटवर्क अपनी गतिविधियां इतने खुफिया अंदाज में चला रहा था कि पड़ोसियों को भी भनक नहीं लगती थी। यहां तक कि, कई लोगों का ब्रेनवाश तक कर दिया गया, तब भी उन्हें पता नहीं चला कि जो लोग सशस्त्र क्रांति की बात कर रहे हैं, वे नक्सली या उनके गुर्गे हैं। पुलिस के करीब 20 दिन के एक्सरसाइज में यह बात सामने आई है।

कैसे करते हैं ब्रेनवाश: नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी पुलिस को ऐसे पर्चे अथवा दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनमें नरसंहार के लिए जिम्मेदार नक्सलियों को महिमा मंडित किया गया है। इन घटना पर लिखी कविताओं के जरिए नक्सल गतिविधियों से जुड़े लोगों में सशस्त्र क्रांति का जज्बा भरा जाता है। उन्हें असली आजादी के हथियार उठाने के लिए भी उकसाया जाता है।





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