वाशिंगटन.ज्यादातर पेड़-पौधों का विकास धरती से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे तत्वों का अवशोषण करके होता है। लेकिन कुछ पेड़-पौधे ऐसे इलाकों में उगते हैं, जहां की धरती में ये तत्व ठीक से नहीं पाए जाते। वहां मौजूद पौधों में ऐसे अंग विकसित हुए जो कीड़े-मकोड़ों को पकड़कर और मारकर पचा जाते हैं। इनमें कुछ अंग तीखे और नुकीले मुंह की तरह होते हैं, जो पौधे पर कीड़े के बैठते ही उसे निवाला बना लेते हैं। कुछ की पत्तियां कीड़े-मकोड़ों को चिपकाकर चूस लेती हैं। कुछ मांसाहारी पौधों में मर्तबान (पिचर) जैसे अंग होते हैं। कीड़े-मकोड़े इनमें गिरकर फंस जाते हैं। पिचर में कीड़े-मकोड़ों को आकर्षित करने के लिए चमकीले रंग और मीठी खुशबू भी कुछ पौधों में पाई जाती है। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मेक्सिको के क्रिस फ्रेजर ने कहा- पिचर प्लांट पर 150 साल से ज्यादा समय से स्टडी होती रही, लेकिन इसकी जटिल पाचन क्रिया के बारे में अभी तक कुछ खास जानकारी नहीं मिल पाई।
अब जापान में इशिकावा प्रीफेक्च्यूरल यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने मांसाहारी पेड़-पौधों के रस में 7 प्रोटीनों की पहचान की है। उन्होंने अपनी लैब में मांसाहारी पौधे उगाए। नए उगे पिचर से उन्होंने रस इकट्ठा किया। मकसद यह पता लगाना था कि कीड़ों में मौजूद इन्फेक्शन से यह कैसे अपना बचाव करता है। उन्होंने पाया कि 3 एंजाइम तो कीड़ों को पचाने में अहम हैं, जबकि अन्य का संबंध फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाने में है। उनका कहना है कि ये एंजाइम इन्फेक्शन से बचाने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन एग्रीकल्चर और मेडिसिन में इनके इस्तेमाल का पता लगाने के लिए पूरे रिसर्च की जरूरत है।