नई दिल्ली.
घटती विकास दर के आंकड़ों ने सरकार को सस्ती ब्याज दरों व आसान कर्ज का सहारा लेने पर बाध्य कर दिया है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकारी बैंकों से कहा है कि आवास और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तु उद्योग को ज्यादा मात्रा में कर्ज उपलब्ध कराएं। आंकड़े बता रहे हैं कि दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन की दर घटकर 7.6 फीसदी रह गई है।
क्या है कारण:
सरकारी बैंकों की बैठक में चिदंबरम ने कहा कि पिछले एक साल से कर्ज की मांग को जानबूझकर धीमा किया गया है। इससे आवास और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में कर्ज की मांग प्रभावित हो रही है।
क्या और घटेंगी ब्याज दरें:
वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने बस अपनी राय बताई है कि आवास और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तु उद्योगों को ज्यादा कर्ज नहीं दिया जा रहा है। यही क्षेत्र अर्थव्यवस्था को गति देने वाले हैं, इसलिए इन्हें ज्यादा कर्ज दिया जाए।
चिदंबरम ने बताया कि ब्याज दरों में कटौती करना या नहीं करना सरकार की इच्छा नहीं है। सरकार उपभोक्ता वर्ग की मांग की तरफ ध्यान दिला रही है। बैंकों को उन हालात के हिसाब से प्रतिक्रिया करनी चाहिए।
बैंकरों की राय है कि ब्याज दरों में और कटौती हो सकती है। बैंकिंग प्रणाली में तरलता काफी ज्यादा है। एसबीआई, एचडीएफसी, कैनरा बैंक, पीएनबी हाउसिंग, बैंक आफ इंडिया पहले ही ब्याज दरें घटा चुके हैं।
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के चेयरमैन एमबीएन राव का कहना है कि ब्याज दरों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है तो रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में भी ब्याज दरें घटनी स्वाभाविक हैं।
* बैंकों ने भरोसा दिलाया है कि कर्ज की मांग धीमी करने का असर उत्पादक क्षेत्रों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। पहले भी मैं स्पष्ट कर चुका हूं कि उत्पादक क्षेत्र को कर्ज के लिए तरसने नहीं देना चाहिए।
-पी चिदंबरम, वित्त मंत्री, बैंकरों के साथ बैठक के बाद।