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जरूरी है बात का प्रस्तुतीकरण

लीडरशिप मंत्र. यह रोचक प्रसंग मेरे साथ 9वीं कक्षा में घटित हुआ था। एक बार अंग्रेजी के टीचर ने हम सभी को उनकी बात ध्यान से सुनने के लिए कहा। उन्होंने हमसे हमारे हाथों को गालों पर रखने के लिए कहा और ऐसा कहते उन्होंने एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपने हाथ ठोढ़ी पर रख लिए। पूरी क्लास के बच्चे भी एक कदम आगे बढ़ गए और अपने-अपने हाथ ठोढ़ी पर रख लिए। यद्यपि कहा गया था कि अपने हाथ अपने गालों पर रखिए।

उस दिन जो सबसे महत्वपूर्ण बात मैंने सीखी वह यह थी कि ‘आप क्या कहते हैं इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप उसे किस तरह से कहते हैं।’ ध्यान रखिए कि जब हम लोगों से मिलते हैं, तो हमारे शब्दों की अपेक्षा हमारे क्रियाकलाप उन पर ज्यादा असर करते हैं। विगत सप्ताह मैं एक लीडरशिप सेमिनार में गया था। एक व्यक्ति वहां ‘जुनून’ पर अपने प्रभावशाली विचार व्यक्त कर रहा था, लेकिन जनता पर उनका कोई खास असर नहीं पड़ा। वक्ता के कंधे झुके हुए थे, जोश और उत्साह खोया हुआ था और उसके शब्द उसकी शारीरिक शब्दावली के साथ मेल नहीं खा रहे थे।

अत: ऐसे मौकों पर जरूरी है कि आपके हावभाव आपके शब्दों के साथ मेल खाएं। आपकी बॉडी लैंग्वेज या आपके हाव-भाव ही आपके शब्दों को प्रभावी बना सकते हैं। यह अभ्यास जरूरी है:

1. आपके हाव-भाव वही संदेश प्रेषित करें, जो आपके मुंह से निकल रहे हों।2. जो कुछ आपनेकहा या किया उस पर दृढ़ रहें। कारण गिनाना सिर्फ खुद की कमजोरियों को छिपाने का एक जरिया है। 3. आप किसी की प्रशंसा करें या आलोचना तो उसे मन से करें। उसे महज औपचारिकता न मानें।

पहले खुद के साथ ईमानदारी बरतें ताकि दूसरे भी आपसे कुछ सीख सकें। लोगों को जीतने के लिए उनके साथ उत्प्रेरक बनकर कार्य करें। इतने सहज बनें कि वे आपको या आप उन्हें समझ सकें।





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