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अटक सकते हैं कई फैसले

इंदौर. स्कूली व उच्च शिक्षा मंत्री बनने के बाद कम समय में ही लक्ष्मणसिंह गौड़ ने ऐसे अनेक निर्णय लिए जो लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। उनके अचानक चले जाने के बाद ऐसे निर्णयों को अमलीजामा पहुंचाना कठिन होगा। कुछ ऐसे निर्णय भी उन्होंने लिए जिन पर अधिकारी सहमत नहीं थे और शासन स्तर पर मंजूरी भी वे ही करवाने वाले थे।

उन्होंने विभाग की समीक्षा बैठकों में ही ऐसे निर्णय ले लिए जो वर्षो तक नहीं लिए जा सके। इनमें कुछ तो पिछले महीने स्कूली व उच्चशिक्षा विभाग की इंदौर में हुई बैठकों में लिए थे। कुछ महत्वपूर्ण फैसलों पर तो उन्होंने शासन से भी मंजूरी की मुहर लगवा ली थी लेकिन स्कूल स्तर पर सेमिस्टर पद्धति लागू करना, जीपीएफ के अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर संकुल स्तर पर देना, विभाग के संयुक्त संचालकों को नए अधिकार देने जैसे निर्णयों को शासन की मंजूरी मिलना है।

बैठकों में उनके सलाहकार की भूमिका में रहे शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक के.के. पांडे ने कहा का कहना है उन्होंने कम समय में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और ज्यादातर को अमलीजामा भी पहनाया। विभाग में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय बी.आर. नायडू ने बताया उन्होंने अधिकारियों को काम करने की जो स्वतंत्रता दी वह पहले नहीं थी। छात्रों और शिक्षकों के हित में कोई निर्णय लिया है तो वह लागू कैसे होगा इसके नियम बनाने के लिए अधिकारी स्वतंत्र हैं बस अमल होना चाहिए। हो सकता है जिन योजनाओं पर अमल रह गया उनकी गति अब धीमी हो जाए।

कॉलेजों में पीपीपी

कॉलेजों में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) का फंडा सुझाया। इसका उद्देश्य निजी लोगों के सहयोग से कॉलेजों का विकास करना था। इसे लागू करने का प्रयास चल ही रहा था। कॉलेजों की दशा सुधारने के लिए उच्च शिक्षा आयुक्त से भवन अनुरक्षित निधि देने को कहा जो कुछ कॉलेजों को मिली और कुछ को देने की तैयारी है।

पांचवी बोर्ड से मुक्ति

उन्होंने माना पांचवीं-आठवीं बोर्ड के कारण पढ़ाई की शुरुआत में ही छात्रों में दहशत बैठ जाती है। इस पर पांचवीं बोर्ड की परीक्षा खत्म कर दी और अगले साल आठवीं बोर्ड खत्म करने की तैयारी है।

शिक्षक केवल पढ़ाएं

शिक्षामंत्री बनते ही घोषणा की शिक्षकों से केवल पढ़ाई ही कराएं। वे जानवर गिनने से लेकर निर्वाचन का कार्य नहीं करेंगे। इसे लागू करने के निर्देश भी दिए।

पलभर में सुलझाए झगड़े

5334 जीएसीसी व लॉ कॉलेज में वित्त को लेकर चल रहा वर्षो का झगड़ा उन्होंने पलभर में निपटाया और दोनों को अलग-अलग कर दिया। 5334 दो महीने पहले एबीवीपी, एनएसयूआई और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच विवाद हुआ और छात्रों को निलंबित कर दिया गया तो रेसीडेंसी पर सभी पक्षों को बुलाया और सुलह करा दी।

अगली बैठक से पहले पुराने निर्णय पर अमल हो

अतिरिक्त संचालक उच्चशिक्षा डॉ. एन.के. दाढ़ ने बताया शहर में हुई दो समीक्षा बैठकों के बाद उन्होंने कहा था समस्याओं के तत्काल निराकरण के लिए प्रस्ताव बनाकर लाएं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश थे अगली समीक्षा बैठक के पहले पुरानी बैठकों के निर्णयों पर अमल हो।

याद रहेंगे उनके निर्णय

उच्च शिक्षा विभाग में वर्षो से खाली प्रोफेसर्स के 786 पद भरने का निर्णय लिया और पीएससी को प्रस्ताव भी भेज दिया।

स्कूली शिक्षा में 15000 शिक्षकों को पदोन्नत करने और 21000 शिक्षकों की संविदा नियुक्ति का फैसला।

प्रोफेसर्स की सेवानिवृत्ति आयु 62 से 65 वर्ष करने का निर्णय लेकर शासन की मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री तक पहुंचाया।

कॉलेज के साथ स्कूल स्तर पर भी सेमिस्टर पद्धति लागू करने की घोषणा।





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