इंदौर.
फर्जी जाति प्रमाण पत्र से बेटी को मेडिकल में एडमिशन दिलाने के मामले में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी, उनकी बेटी डॉ. हेमलता ढांढ व भाई नारायणसिंह सिंगार के खिलाफ संयोगितागंज थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। वर्षो पुराना यह मामला बदलते राजनीतिक दौर में प्रकाश में आया और पुलिस छह महीने तक जांच करती रही। मेहनू (हरसूद) निवासी रामसिंह पल्लवी ने 23 अगस्त 2007 को आईजी भोपाल को शिकायत की थी प्रदेश के प्रभावशाली लोग आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं।
आगे लिखा था जमुनादेवी ने गुलाबचंद वर्मा (जाति सुतार) से शादी की थी। उनकी बेटी हेमलता ने झाबुआ से पांचवीं व धार से आठवीं पास की। दोनों स्कूलों में उसका नाम हेमलता वर्मा पिता गुलाबचंद वर्मा, जाति हिंदू लिखी है क्योंकि उसके पिता जाति से सुतार थे जो सामान्य श्रेणी में आती है। फिर उसने इंदौर में कलेक्टोरेट के सामने उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से 11वीं पास की और आदिवासी (भील) का फर्जी प्रमाण पत्र देकर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया। इसमें जमुनादेवी के राजनीतिक प्रभाव का दुरूपयोग भी किया गया।
ये शिकायतें भी
फर्जी प्रमाणपत्र जमुनादेवी के भाई नारायणसिंह ने 1965 में झाबुआ में पुलिस उपअधीक्षक रहते अपने हस्ताक्षर व मोहर से जारी किया। तब जमुनादेवी सांसद थीं।
जमुनादेवी ने डीन, मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखा- हेमलता वर्मा मेरी बेटी भील, आदिवासी है। उसे एडमिशन दिया जाए।
हेमलता वर्मा ने इसी आधार पर एमडी किया व मेडिकल कॉलेज में नौकरी भी लगी।
शादी के बाद उसका सरनेम ढांढ हो गया, जो इन दिनों मेडिकल कॉलेज के गायनिक विभाग में प्रोफेसर तथा एमटीएच प्रसूतिगृह की प्रभारी हैं।
एमबीबीएस में एक पद आदिवासी के बजाय गैर आदिवासी हेमलता को दिलाया गया।
छह महीने चली जांच : मामला भोपाल से इंदौर आया तो करीब छह महीने तक जांच चलती रही। टीआई, संयोगितागंज संतोषसिंह भदौरिया के मुताबिक जमुनादेवी, हेमलता व नारायणसिंह सिंगार के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।