भोपाल. बांग्लादेशी डकैतों को पकड़ने के मामले में वाहवाही लूट चुकी राजधानी पुलिस के लिए यह बुरी खबर है। अदालत ने बुधवार को पुलिस की कार्रवाई को जमकर लताड़ लगाते हुए तीनों आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। राजधानी में हुए डकैती जैसे गंभीर अपराध में आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का यह पहला मामला है। अदालत ने पुलिस की ओर से पेश चालान को इस लायक भी नहीं समझा कि उसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जा सके। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश एके दुबे ने लिखा है कि यदि पुलिस की ओर पेश दस्तावेजों को सही मान भी लिया जाए, तो आरोपियों को किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने लिखा है कि पुलिस ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाई जिससे साबित हो कि ये आरोपी डकैती में शामिल थे और अपराध के समय भोपाल में अपराध स्थल पर मौजूद रहे हों। इसी प्रकार इनके खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में भी पुलिस कोई सबूत पेश नहीं कर सकी।
क्या था मामला
हबीबगंज पुलिस ने वर्ष 2006 में अपराध क्रमांक 686/06 पर डकैती का मामला दर्ज किया था। जिसमें डकैती, जानलेवा हमला करने और धारा 3 पासपोर्ट अधिनियम का मामला कायम किया गया था। पुलिस ने आरोपी मोहम्मद जलाल, मोहम्मद जहांगीर, बच्चू, अब्दुल अबुल उर्फ ओकन, मोहम्मद फारूख, मंसूर खान को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने बताया था कि डकैती में उनके साथ मेहबूब, कमाल व जाकिर भी शामिल थे। इसी आधार पर पुलिस ने मेहबूब, कमाल और जाकिर को गिरफ्तार कर पूरक चालान पेश किया था।
अदालत की कार्रवाई
अपर सत्र न्यायाधीश ने पुलिस की ओर से पेश चालान में मेहबूब, कमाल और जाकिर के खिलाफ सबूत न होने से दोषमुक्त कर दिया।
मामले और भी हैं
बांग्लादेशी डकैतों के खिलाफ राजधानी में तीन और मामले लंबित है। इनमें से मेहबूब, कमाल और जाकिर के खिलाफ एक मामले में गुरुवार को सुनवाई होगी। इस मामले में मोहम्मद जलाल, मोहम्मद जहांगीर, बच्चू, अब्दुल अबुल उर्फ ओकन, मोहम्मद फारूख, मंसूर खान भी आरोपी है। ये सभी आरोपी फिलहाल भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है। यह मामला भी सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश एके दुबे की अदालत में लंबित है। डकैती का यह मामला बैरागढ़ थाने ने दर्ज किया था।
किन धाराओं में दर्ज है मामले
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 395,397,212,216 एवं धारा 3 पासपोर्ट अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास तथा एक लाख रुपए तक की सजा का प्रावधान है।