भोपाल.
राजधानी के कुछ सरकारी कालेजों में विवाद की स्थिति है। वजह है वहां लगाई जाने वाली थंब मशीन (बायोमेट्रिक मशीन)। शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने वाली 1 लाख 42 लाख रुपए की कीमत वाली इस मशीन के लिए पैसे के इंतजाम का जिम्मा प्राचार्य को सौंपा गया है। जबकि जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष इसके लिए तैयार नहीं हैं। मशीन मप्र स्टेट इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कापरेरेशन से खरीदी जानी है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्राचार्र्यो के बीच घबराहट की स्थिति स्वीकारी है।
जहां लागू है व्यवस्था
सरोजिनी नायडू गल्र्स कालेज: कालेज में लगी दो में से एक थंब मशीन खराब पड़ी हुई है। शिक्षिकाओं का कहना है कि यह मशीन ठीक तरीके से फिंगर प्रिंट रीड नहीं कर पाती है। कई बार फिंगर की इमेज मशीन में फीड इमेज से मैच नहीं होती। प्राचार्य शोभना वाजपेयी मारू ने बताया कि मशीन का भुगतान जन भागीदारी समिति की मद से किया गया है।
महारानी लक्ष्मी बाई कालेज: भास्कर की पड़ताल बताती है कि यहां लगी दोनो थंब मशीनें खराब हो चुकी हैं। उन्हें एक महीने पहले मरम्मत के लिए भेजा गया, जहां से वे अब तक वापस नहीं आई हैं। काम पुराने र्ढे पर ही चल रहा है। हालांकि फोन पर बातचीत में प्राचार्य पुष्पा त्यागी ने दावा किया कि चार महीने पहले लगाई गई मशीनें ठीक से काम कर रही हैं।
जहां लागू होनी है व्यवस्था
मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय: यहां भी मशीन की दरकार है। समस्या जन भागीदारी समिति को लेकर है। प्राचार्य प्रो. ओपी जैन ने भास्कर को बताया कि मशीन के लिए 1 लाख 42 हजार रुपए की जरूरत है। दिक्कत यह है कि जन भागीदारी समिति के सदस्य इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
भेल पीजी कालेज: यहां मशीन लगनी है। विवाद कीमत को लेकर है। प्राचार्य डा. आभा गार्गव ने बताया कि मशीन के लिए जन भागीदारी समिति की बैठक बुलाई गई है। समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी का कहना है कि शासन ने अब तक मशीन के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है।
विभाग का कड़ा रवैया
व्यवस्था को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने कड़ा रवैया अपनाया है। उसके आयुक्त की ओर से हालिया जारी आदेश में कहा गया है कि ‘यह सूचना मिली है कि जनभागीदारी समिति के अनुमोदन की आड़ लेकर कॉलेजों में शासकीय निर्देशों की अवहेलना की जा रही है।
प्राचार्र्यो का दायित्व है कि वे निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराएं। निर्देशों का पालन न होने की स्थिति में यह प्रतीत होता है कि प्राचार्य जनभागीदारी समिति से समन्वय स्थापित कर शासन के निर्देशों का पालन करने में अक्षम साबित हुए हैं। ऐसे में उन्हें प्राचार्य के रूप में संबंधित कॉलेज में पदस्थ करने के शासन के निर्णय पर प्रश्नचिह्न् लगता है।’
अब प्राचार्र्यो का पक्ष यह है कि अगर समिति के सदस्य इसके लिए तैयार नहीं होते तो इसमें वे या करें। वैसे भी मशीन का ज्यादा उपयोग नहीं है। प्राचार्र्यो ने बताया कि आदेश में यह भी कहा गया है कि कुछ कॉलेजों में शरारती तत्वों द्वारा मशीन के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है इसलिए इसकी रिपोर्ट पुलिस को करें। उनका तर्क है कि कॉलेजों में पंखे और फर्नीचर भी है अगर यह खराब होते हैं तो क्या इसकी रिपोर्ट भी पुलिस को करना होगी।
घोटाला तो नहीं?
कालेज के प्राचार्र्यो और जन भागीदारी समिति के अध्यक्षों ने तो मशीन खरीदी में घोटाले की आशंका तक जताई है। नवीन कॉलेज की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष भगवत पटेल के अनुसार जन भागीदारी का धन छात्रों के हित में खर्च होना चाहिए। इस बात की क्या गारंटी है कि मशीन लग जाने के बाद शिक्षक बगैर सूचना कहीं जा नहीं पाएंगे?
बेनजीर कॉलेज की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष राजेंद्र विजयवर्गीय का कहना है कि मशीन सरकार खरीदे यह जनभागीदारी मद से क्यों ली जा रही है। उनका आरोप है कि यह वित्तीय फायदे के कारण लगाई जा रही है।
क्या है थंब मशीन
इसमें कालेज के प्रत्येक शिक्षक का फिंगर प्रिंट फीड किया जाता है। कालेज आने पर शिक्षक जब अपना अंगूठा मशीन पर रखता है तो फीड प्रिंट से उसका मिलान कर मशीन उपस्थिति दर्ज कर लेती है। मशीन में उनकी छुट्टियों का रिकार्ड भी होता है। इस व्यवस्था के बाद हाजिरी रजिस्टर में दस्तखत करने की जरूरत नहीं रह जाती है।
सच्चई सामने आने का भय
शासन का आदेश है तो मशीनें तो लगेंगी ही। दरअसल स्टाफ इसलिए भयभीत है क्योंकि उनकी असलियत सामने आ जाएगी। अगले वित्तीय वर्ष से मशीन में दर्ज रिकार्ड इंटरनेट पर अपलोड किया जाएगा। जिसे कोई भी देख सकेगा। शिक्षक समय पर कालेज आएं इसलिए यह मशीन लगाई जा रही है।
—आशीष उपाध्याय, आयुक्त, उच्च शिक्षा