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प्यार को प्यार रहने दो

देव आनंद की कलम से.

दिल का भंवर करे पुकार, आज है प्यार का वार। इक़रार, इज़हार और ऐतबार का वार। दिलों का मिलना वैसे ही तय होता है, जैसे बहार आने पर फूल का खिलना। बॉलीवुड के सबसे रोमांटिक हीरो देव आनंद सुना रहे हैं प्यार का राग..

मोहब्बत से चलती है दुनिया

प्यार से हम-तुम हैं। प्यार से समाज है। प्यार से दुनिया चलती है। हमारी हर गतिविधि के केंद्र में कहीं प्यार ही होता है। एक मÊादूर दिन भर अथक परिश्रम करता है, तो इसीलिए कि वह अपने बीवी-बच्चों को प्यार करता है। एक अपराधी अपने बीवी-बच्चों को मार देता है या छोड़ देता है तो इसलिए कि वह किसी और से प्यार करता है। कहने का मतलब यह है कि महान से लेकर घृणास्पद कार्यो तक सभी कुछ प्यार के वशीभूत होता है। मां-बाप अपने बच्चों से, राष्ट्रभक्त अपने देश से, कलाकार अपनी कला से, महात्मा परमात्मा से प्यार करते हैं। प्यार सबसे कर्म करवाता है। प्यार न हो, तो जीवन की गति ही ठहर जाएगी। मोहब्बत से दुनिया चलती है।

प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है

अगर प्रेमी-प्रेमिका वाले प्यार की बात करें, तो जितनी बात करें, कम होगी। इस पर इतने ग्रंथ, इतनी किताबें, इतने फिल्मी गाने लिखे जा चुके हैं, फिर भी इसकी व्याख्या अधूरी है। पता नहीं क्यों, किसको, कैसे किसी से प्यार हो जाता है। ऐसे लोग भी होते हैं, जो शादी कर लेते हैं, एक छत के नीचे Êिांदगी गुÊार देते हैं, मगर उनके बीच प्यार नहीं होता। ऐसे भी लोग हैं, जो पहली नÊार में प्यार कर बैठते हैं और Êिांदगी-भर न मिलने पर भी प्यार उनके दिलो-दिमाग़ में Êिांदा रहता है। प्यार की उम्र एक पल से लेकर एक जीवन तक कुछ भी हो सकती है। प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है। और जो किया जाता है, वह अक्सर प्यार नहीं होता।

जाने कब किसी से प्यार हो जाएप्यार होने के लिए सुंदरता आवश्यक शर्त होती है, लेकिन इस सुंदरता की कोई परिभाषा नहीं होती। आमतौर पर पुरुष का मन ऐसी स्त्री की कल्पना करता है, जिसकी बड़ी-बड़ी आंखें झील-सी गहरी हों, पर क्या बड़ी आंखों वाली सभी स्त्रियां ख़ूबसूरत होती हैं? क्या सुराही-सी लंबी गरदन वाली या गुलाब की कली जैसे होंठों वाली सभी स्त्रियां ख़ूबसूरत होती हैं? क्या छरहरी काया और गोरे रंग वाली सभी स्त्रियां सुंदर होती हैं? पहली बात तो ये सारी विशेषताएं एक स्त्री में हो नहीं सकतीं। और अगर हों भी, तो जरूरी नहीं कि वह सभी को सुंदर नÊार आए।

मेरे कहने का मतलब यह है कि प्यार का सुंदरता से संबंध तो है, पर कोई संबंध नहीं। या यूं कहिए कि सबका सुंदरता को देखने का पैमाना अलग-अलग होता है। स्टारों में ही देखिए, किसी को ऐश्वर्या राय सबसे सुंदर लगती हैं, तो कोई तब्बू, बिपाशा, करीना या रानी को सबसे Êयादा सुंदर पाता है। क्या पता किसकी चाल, किसकी मुस्कुराहट, किसका पलकें झपकाना या किसका हल्का-सा बल खाना आपके दिल-दिमाग़ को झकझोर कर रख दे और आप उसके दीवाने हो जाएं। पता नहीं किसकी आवाÊा, अंदाÊा या स्पर्श आप पर जादू कर जाए। स्त्री के दृष्टिकोण से पुरुषों पर भी यही बात लागू होती होगी।

मन से मन का मिलन कम तो नहीं

जिस प्यार की बात चल रही है, उसका संबंध मन से यानी चेतना से होता है। यह बात अलग है कि तन और मन का सीधा रिश्ता होता है। भ्रूणावस्था से ही हमारे शरीर में चमत्कारी परिवर्तन होते चले आते हैं। वयस्क होने पर हमारे फेरोमिंस (स्त्री-पुरुष के आकर्षण के लिए जिम्मेदार हार्मोस) ज़ोर मारने लगते हैं। अपोज़िट सैक्स के प्रति आकर्षण बढ़ जाता है। मेरे ़ख्याल से जिसे हम प्यार कहते हैं, उसके मूल में यौनाकर्षण ही होता है। पशु-पक्षी से लेकर हम इंसानों तक सभी फेरोमिंस के ग़ुलाम हैं, लेकिन हमारे पास विकसित मस्तिष्क भी है, जो फेरोमिंस से पगलाए वासना के घोड़े को मर्यादा की लगाम लगाता है और लगाना ज़रूरी है। मैं निजी तौर पर शारीरिक प्यार की जगह भावनात्मक प्यार में विश्वास करता हूं। लेकिन अगर दो लोग कमिटेड हैं, जीवन भर साथ निभाने की इच्छा रखते हैं, तो तन से तन का मिलना भी ग़लत क्या है!

सौ साल पहले हमें तुमसे प्यार था..

बिल्कुल ग़लत। ये बातें पढ़ने-सुनने में और फिल्मों में ही अच्छी लगती हैं। मैंने कहा ना कि प्यार की उम्र एक पल से लेकर एक पूरे जीवन तक कुछ भी हो सकती है। प्रैक्टिकल बात यह है कि जब तक दिल मिले हैं, तब तक प्यार है। विपरीत परिस्थितियां और दूरियां प्यार को असमय भी मार सकती हैं। प्यार जब मर जाए, तो दिल के मकान में उसकी लाश रखकर Êिांदगी भर रोना बेकार है। सुंदर-प्रेरणाप्रद यादों को रखो और लाश का अंतिम संस्कार कर नए प्यार का स्वागत करो। यह बेवफ़ाई नहीं, जीवन का मंत्र है।

ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहींयह सोच रखने वाले हीर-रांझा, लैला-मजनूं, शीरी-फरहाद, रोमियो-जूलियट जैसे प्रेमियों को मैं आज के लिए आदर्श नहीं मानता। वे अपने-अपने देश-काल के लिए आदर्श रहे होंगे। इनके प्रेम की गहराई तो प्रशंसनीय है, लेकिन इनका प्रेम अवसाद, अविवेक, असंसारिकता जैसी चीÊाों के नीचे दबा हुआ है। जिनके जीवन का उद्देश्य सिर्फ़ एक स्त्री हो, उनके लिए यह ठीक हो सकता है, पर मेरे खयाल से बात वही सही है कि ‘प्यार से भी जरूरी कई काम हैं, प्यार सब कुछ नहीं आदमी के लिए।’

न उम्र की सीमा हो..प्यार में वाकई उम्र की सीमा नहीं होती। आप किसी भी उम्र में किसी भी उम्र की स्त्री/पुरुष को प्यार कर सकते हैं। लेकिन इसमें मर्यादाओं का बंधन होना बहुत जरूरी है। प्यार के हाथों में सृजन भी है और विध्वंस भी, विकास भी हैं और विनाश भी। सामाजिक मूल्यों और मर्यादा के सहारे आप प्यार के सृजन और विकास वाले हाथ तक पहुंच सकते हैं। जो इन चीÊाों को नÊारअंदाज कर प्यार करते हैं, उन्हें प्यार अपराध की ओर खींच ले जाता है। वास्तव में वह प्यार नहीं, वासना होती है। मेरे लिए तो प्यार हमेशा एक प्रेरणा रहा है। प्यार मुझे ऊर्जा देता है। प्यार मुझे सृजनशील बनाए हुए हैं। मैंने आज तक जितनी फिल्में बनाई हैं, जितना भी काम किया है, वह किसी न किसी रूप में प्यार से ही प्रेरित है। आइ एम थोरोली रोमांटिक पर्सन।’

व़क्त ने किया क्या हसीं सितम

व़क्त प्यार की आत्मा को नहीं बदल सकता, लेकिन चोले को सचमुच बदला है। प्यार के बदले हुए मुखौटे का आईना हमारी फिल्में भी हैं। पहले आंखों-आंखों में प्यार की शुरुआत होती थी, बरसों इÊाहार में लगते थे और अंत में शादी हो जाती थी।

आज महानगरों के आधुनिक लड़के-लड़कियां ‘आई लव यू’ कहते देर नहीं लगाते। शादी होना कोई अनिवार्य शर्त नहीं रही और हो भी जाए तो जीवन भर निभाना कोई अनिवार्य शर्त नहीं रही। बाकी तो सब वैसा ही है। जब दो लोगों को प्यार होता है तो दुनिया गुलाबी हो उठती है। मई-जीन की दोपहरें चांदनी रात बन जाती हैं और खामोशी भी संगीत बिखेरती प्रतीत होती है। जुदाई में आज भी आत्महत्याएं होती हैं, नर्वस ब्रेक डाउन होते हैं।

-प्रस्तुति : अनिल राही





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kavita
Friday, 15th Feb 2008, 13:46
aap too sacmuc ka jindagee kee bare mee likhe ho usake liye bahut-bahut danyavad O.K Byyyyyyyyyy cu