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16 करोड़ में भी ‘टाटपट्टी’

बिलासपुर. जिले के अधिकांश हाईस्कूल अब भी फर्नीचर विहीन हैं। कुछ स्कूलों में फर्नीचर तो पहुंचा है, लेकिन फर्नीचर की तुलना में वहां परीक्षा देने वालों की संख्या तिगुनी से भी अधिक है। ऐसी स्थिति में परीक्षार्थियों को इस साल भी जमीन पर बैठकर परीक्षा देनी पड़ सकती है। अधिकारियों की सुस्ती ग्रामीण परीक्षार्थियों को कहीं इस साल भी टाटपट्टी पर बैठकर परीक्षा देने पर मजबूर न कर दे। परीक्षा को लेकर चिंतित रहने वाले छात्रों का ध्यान तो इस ओर कम ही जाता है कि उनके लिए फर्नीचर की व्यवस्था है या फिर टाटपट्टी की, लेकिन यह विचार करने का विषय है कि स्कूलों की व्यवस्था में खर्च करने के लिए जारी की गई राशि अब तक स्कूलों तक क्यों नहीं पहुंची है?

इस संबंध में स्कूल प्राचार्यो ने शिक्षा विभाग से शिकायत की है, जिस पर विभाग ने 25 फरवरी तक पर्याप्त फर्नीचर उपलब्ध कराने की बात कही है। इधर फर्नीचर नहीं पहुंच पाने की स्थिति में परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था को लेकर केंद्राध्यक्ष चिंतित नजर आ रहे हैं। शहर के स्कूलों में तो लगभग सारी सहूलियतें हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। ऐसी स्थिति में छात्रों को परीक्षा के दौरान पिछले वर्षो की तरह ही परेशानी होने वाली है।

जानकारी के अनुसार खोंगसरा हाईस्कूल में अब तक फर्नीचर नहीं पहुंचे हैं। यहां दसवीं व बारहवीं के परीक्षार्थियों की संख्या करीब सौ है। इसी तरह अमोरा हाईस्कूल में भी फर्नीचर नहीं पहुंचा है। यहां दसवंी व बारहवीं के करीब 135 परीक्षार्थी हैं। इसी तरह कन्या हाईस्कूल मुंगेली में एक हजार परीक्षार्थियों के पीछे केवल 150 फर्नीचर ही दिए गए हैं। प्राचार्य द्वारा और फर्नीचर की मांग की गई है।

कन्या हाईस्कूल चकरभाठा में भी 350 परीक्षार्थियों के लिए केवल 250 फर्नीचर उपलब्ध कराए गए हैं। सेमरताल हाईस्कूल में 145 परीक्षार्थयों के पीछे आधे से भी कम फर्नीचर की व्यवस्था की गई है। इसी तरह डांडगांव के सौ परीक्षार्थियों के लिए आधे फर्नीचर ही उपलब्ध कराए गए हैं। उल्लेखनीय है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षा केंद्रों को दुरुस्त करने के लिए राज्य में 16 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है। मंडल ने उक्त राशि संचालक लोक शिक्षण को उपलब्ध करा दी है, जिसे संचालक द्वारा सभी जिला शिक्षाधिकारियों को उनकी आवश्यकतानुसार वितरित किया गया है।

इस राशि से परीक्षा केंद्रों में बिजली, पानी, शौचालय निर्माण एवं फर्नीचर की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही जिन स्कूलों में बिजली की व्यवस्था नहीं है, वहां सौर ऊर्जा से बिजली की व्यवस्था करने की योजना है। इन सभी कार्यो के लिए लोक निर्माण विभाग, विद्युत मंडल एवं ऊर्जा विकास अभिकरण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संबंध में जानकारी के लिए डीईओ से संपर्क किया गया, लेकिन आवश्यक बैठक में शामिल होने शहर से बाहर जाने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका।





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