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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
‘ठिठुरन, सिहरन, कंपकंपी, जाड़ा’ सहित ठंड से जुड़े ऐसे कई शब्द लोग फरवरी आते-आते भूलने लगते थे, लेकिन इस बार तो हाड़तोड़ ठंड ने लोगों की हालत खराब कर दी है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, लोगों के मन में ठंड को लेकर जिज्ञासा भी बढ़ती जा रही है। बसंत पंचमी के बाद भी ठंड में कमी नहीं आ रही है।
लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है और खुद मौसम विभाग भी हैरान है। सूत्रों के मुताबिक पिछले 25 सालों में इतनी कड़ाके की ठंड नहीं पड़ी। ठंड न केवल बहुत तीव्र है, बल्कि इसकी अवधि भी लंबी है। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब राज्य में 15 दिनों तक शीतलहर चल रही है। 13 फरवरी, 1997 में अंबिकापुर में पारा 7 डिग्री पर पहुंच गया था, जबकि बुधवार को 3.4 डिग्री है। इधर बिलासपुर में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पेंड्रा रोड स्थित मौसम वेधशाला में बुधवार को 6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के मुताबिक इस बार प्रदेश के मौसम को एक साथ बंगाल की खाड़ी व उड़ीसा के आसपास बने चक्रवात ने तो प्रभावित किया ही, उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रही बर्फबारी का असर भी यहां के मौसम पर हुआ। दोनों ही दिशाओं से हवाओं ने प्रदेश में नमी लाकर यहां के मौसम को एकदम बदलकर रख दिया।
नमी के कारण ही पिछले दिनों रायपुर व बिलासपुर संभाग में बारिश हुई थी, जिसके कारण वर्तमान में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बस्तर संभाग में बारिश का सिलसिला अभी भी जारी है। कई बार शीतलहर की स्थिति निर्मित हो चुकी है और कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कई बार पाठ क्षेत्रों में पारा शून्य डिग्री पर पहुंचा और बर्फ की चादरें जम गईं, जबकि मैदानी इलाकों में तेज ठंडी हवा चलने के कारण लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। न्यूनतम तामपान में सामान्य 5 से 8 डिग्री तक गिरावट होने से शीतलहर की स्थिति निर्मित हुई। करीब पंद्रह दिनों तक आसमान में बादल होने के कारण सूरज का दर्शन लोग ठीक से नहीं कर पाए थे।
लाखों की फसल चौपट
पिछले दिनों हुई बारिश और बदली के कारण बिलासपुर संभाग के सभी जिलों में रबी की लाखों रुपए की फसल तबाह हो गई। अकेले बिलासपुर जिले में करीब साढ़े दस लाख की चना, तिवड़ा, सरसो, मसूर, मटर आदि फसल कीट-पतंग व बादलों के कारण खराब हो गए। कृषि विभाग के उपसंचालक आरके कश्यप कहते हैं कि ऐसा मौसम पहले कभी देखने-सुनने में नहीं मिला। बारिश से ज्यादा बादलों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है।