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पगारा के जंगल से अपहृत मुक्त कराया

मुरैना.g डकैत वकीला गुर्जर गिरोह से मुठभेड़ के बाद जौरा पुलिस ने एक अपहृत को मुक्त करा लिया लेकिन डकैत तीन अपहृतों के साथ भाग जाने में सफल रहे। मुक्त युवक का चार माह पूर्व अपहरण हुआ था।

जौरा एसडीओपी सीताराम सत्या ने बताया कि मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे सूचना मिली कि पगारा क्षेत्र में सात-आठ बदमाशों का मूवमेंट देखा गया है। इस पर पगारा डैम के पास कैंप किए हुए एसएएफ जवानों को सूचना दी गई। जौरा थाना प्रभारी रामहेत सिंह पुलिस पार्टियों के साथ पगारा के जंगल में पहुंचे। सुमावली थाना प्रभारी श्यामचंद्र शर्मा को भी सुमावली की ओर से घेरने के लिए कहा। पगारा डैम के पास जंगल में पुलिस कर्मियों ने जब वहां बैठे डकैतों को ललकारा तो उन्होंने पुलिस

पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी, जवाब में पुलिस ने भी अपनी बंदूकों के मुंह खोल दिए। पुलिस ने तकरीबन 28 राउण्ड फायरिंग की। इसी दौरान आवाज आई कि फायरिंग बंद कर दो, बदमाशों ने मुझे पेड़ से बांध रखा है। पुलिस ने फायरिंग बंद कर आवाज वाले स्थान पर देखा तो उसे रामेश्वर पुत्र छोटेलाल कुशवाह निवासी गोलू का पुरा तिघरा सांकलों से जकड़ा व पेड़ से बंधा हुआ मिला। पुलिस ने उसे मुक्त कराया और अपने साथ ले आई।

कैसे हुआ था रामेश्वर का अपहरण: गोलू का पुरा थाना तिघरा ग्वालियर निवासी रामेश्वर पुत्र छोटेलाल कुशवाह का अपहरण अक्टूबर 07 को गुप्तेश्वर महादेव ग्वालियर के पास से हुआ था। उस समय केथई निवासी हलुका व बीरबल ने अपने अन्य सात-आठ साथियों के साथ उसका अपहरण कर लिया। इस संबंध में रामेश्वर के भाई ने जनकगंज थाने में आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कराया था। बिका भी अपहृत: बीरबल और हलुका ने रामेश्वर का अपहरण करने के बाद उसे वकीला गैंग को बेच लिया। अपहृत रामेश्वर ने बताया कि हलुका और बीरबल ने तीन-चार दिन अपने पास रखा और इसके बाद उन्होंने वकीला गुर्जर व बालिस्टर गुर्जर की गैंग को बेच दिया।

पिछले चार महीने से वह इसी गैंग के पास था। रामेश्वर के मुताबिक डकैत वकीला गुर्जर ने उसके परिवार से फिरौती के रूप में पांच हजार रुपए मांगे थे। लेकिन उसके परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह फिरौती की राशि दे पाता। इसी वजह से वह इतने लंबे समय से डकैतों के निरोध में था।

डकैतों के कब्जे में हैं तीन और अपहृत: डकैत वकीला गुर्जर के चंगुल से मुक्त हुए रामेश्वर कुशवाह ने बताया कि डकैतों के पास तीन अपहृत और हैं। इनमें एक की उम्र करीब 50 से 55 के बीच है, दूसरा तकरीबन 15 साल का है और तीसरा तकरीबन 12 साल का है। जब पुलिस से डकैतों की मुठभेड़ हुई थी तब बदमाशों ने उसे पेड़ से बांध रखा था। पुलिस को नजदीक आते देख डकैत उसे छोड़कर भाग निकले।

पैर में बेड़ियां और नाक में नकेल

पंद्रह हजार के इनामी डकैत वकीला की गिरफ्त से छूटे गोलू का पुरा निवासी रामेश्वर का रोम-रोम डकैतों के क्रूर होने की गवाही देता है। डकैतों ने उसपर किस कदर सितम ढहाए हैं उसे देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्वालियर से चार महीने पहले अपहृत किए गए रामेश्वर कुशवाह के पैर में पहले तो डकैतों ने रस्सी बांधी, जिससे वे उसे पेड़ आदि से बांध कर रखते थे। लेकिन जब रस्सी टूट गई तो उन्होंने उसके पैर में सांकल और ताला बांध दिया जिससे वे उसे पेड़ से बांध देते थे।

तीन दिन पहले डाली नाक में नकेल: डकैतों ने तीन दिन पहले ही रामेश्वर की नाक में नकेल डाली थी। रामेश्वर ने बताया कि बदमाशों ने बेदर्दी से उसकी नाक को छेद डाला और उसमें तार का एक छल्ला डाल दिया। डकैत इस छल्ले में रस्सी बांधकर चला करते थे। जब कभी वह डकैतों से कुछ कहता तो वे उसकी जमकर मारपीट किया करते थे।

तन पर फटे कपड़े और चेहरे पर बढ़ी दाढ़ी: रामेश्वर के तन पर वही कपड़े थे जो उसने चार महीने पहले अपहरण से पहले पहने थे। ये कपड़े कई जगह से फट चुके थे।

चार माह से नहीं खाया भरपेट खाना: डकैत वकीला की पकड़ से छूटे रामेश्वर ने बताया कि उसने चार माह से भरपेट खाना भी नहीं खाया है। कभी डकैत उसे दो रोटी तो कभी एक रोटी खाने को देते थे। जब भी वह कुछ खाने के लिए कुछ मांगता तो वे उसकी मारपीट शुरू कर देते।





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