जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने नीलू राणा हत्याकांड के अभियुक्त अंकुश बधवा के प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित अवमानना प्रसंज्ञान पर कोटा के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि वह मामले के जांच अधिकारी को अदालत में पेश करें। यदि जांच अधिकारी अदालत में पेश नहीं होते हैं तो कोटा पुलिस अधीक्षक स्वयं 22 फरवरी, 08 को अदालत में पेश हों और स्पष्टीकरण दें। यह आदेश न्यायाधीश आर.सी.गांधी एवं चतराराम जाट की खंडपीठ ने दिए।
क्या है मामला
नीलू राणा हत्याकांड में अभियुक्त अंकुश बाधवा को अधीनस्थ अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस आदेश को बधवा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई के दौरान कोटा के राधेश्याम शर्मा नाम के व्यक्ति ने राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश सहित देश के प्रधानमंत्री एवं अन्य 21 महत्वपूर्ण व्यक्तियों को पत्र लिखा। पत्र में उसने आरोप लगाया कि इस मामले में फैसला अंकुश के पक्ष में होगा।
ऐसा इसलिए है क्योंकि मामले में अंकुश की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एस.आर. बाजवा ने मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश वी.के.बाली की पत्नी के माध्यम से अंकुश के पक्ष में निर्णय दिलाने के लिए सौदा कर लिया है।
उसने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि अब इस मामले में पक्षपात होगा और उसे न्याय की उम्मीद नहीं है । इस पत्र को अदालत ने अवमानना मानते हुए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर पुलिस को आदेश दिए कि वह पत्र लिखने वाले का पता लगाए।
इस पर 31 अक्टूबर, 07 को अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस मामले में नियुक्त जांच अधिकारी अभी तक पत्र लिखने वाले का पता नहीं लगा पाए हैं। इस पर अदालत ने कहा कि पुलिस का यह दायित्व है कि वह मामले की जांच कर सत्यता को अदालत के सामने लाए।