नई दिल्ली. विमान अपहरण के कानून में संशोधन कर उसे और सख्त किए जाने की कवायद जारी है और इस विषय में सरकार गुरुवार को कोई फैसला ले सकती है।
एंटी-हाईजैकिंग एक्ट 1982 में संशोधन के प्रस्ताव के तहत कहा गया है कि हाईजैकरों पर बिल्कुल दया नहीं की जाना चाहिए और उन्हें उम्र कैद के स्थान पर सजा-ए-मौत का प्रावधान करना चाहिए। कैबिनेट इस प्रस्ताव पर आज कोई निर्णय ले सकती है।
एसर डेक्कन के सीईओ कैप्टन गोपीनाथ का कहना है कि यह नीति काफी समय से लंबित है। वहीं, केंद्रीय उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने भी माना है कि हाईजैकिंग एक असहनीय अपराध है और हाईजैकरों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
इस प्रस्ताव में एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है, अगर संशोधन पूरी तरह से हुआ तो सख्ती से पेश आने की कवायद के चलते अब यह कानून होगा कि हाईजैक किए गए विमान को उड़ा दिया जाएगा। कैबिनेट की बैठक शुरू हो चुकी है और यह चौथा प्रस्ताव तैयार किया गया है इसलिए पूरी संभावना है कि इस बार कोई संशोधन किया जा सकता है।