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Valentines Day Valentines Day पुणे. वेलेंटाइन डे न्यूज : वेलेंटाइन डे पर प्रेम का इजहार किया जाता है लेकिन प्रेम सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच ही तो नहीं होता। प्रेम देश से होता है, मानवता से और संस्कृति के हर उस पहलू से जो मानव विकासक्रम का महत्वपूर्ण अंग रहा है। भाषा, एक ऐसा ही महत्वपूर्ण पहलू है। इस साल भाषा से प्यार के इजहार की जरूरत है।
भाषा ही वह माध्यम है जो दूसरे को बताती है कि आपकी भावनाएं या आपके विचार क्या हैं। और दूसरे शब्दों में कहा जाए तो हर भाषा में प्रेम की एक भाषा निहित है और उसे समझने के लिए भाषा विज्ञान सीखने की जरूरत नहीं होती। याद कीजिए, फिल्म एक दूजे के लिए के एक मशहूर गीत का अंतरा - कितनी जुबानें बोलें लोग हमजोली.. दुनिया में प्यार की एक है बोली.. बोले जो शमां-परवाना.. मैंने नहीं जाना, तूने नहीं जाना..
गौर जरूर कीजिए इन पंक्तियों पर, एक सरल लेकिन महान संदेश, और एक दुखद सच यह भी कि इस संदेश को हमने नहीं जाना! इसका ताजा उदाहरण है महाराष्ट्र : जहां भोजपुरी भाषी नफरत के शिकार हो रहे हैं और भोजपुरी फिल्मों को थिएटरों उतारा जा रहा है। इस सिलसिले में अगर गौर किया जाए तो वेलेंटाइन डे पर एक खबर है जो बताती है कि भाषा दिलों के बीच दीवार नहीं बल्कि दिलों में पड़ीं दरारों को मिटाने का जरिया है।
उधेड़बुन को सिल्वर बीयर :
एफटीआईआई के छात्र सिद्धार्थ सिन्हा द्वारा निर्मित भोजपुरी भाषा की शॉर्ट फिल्म उधेड़बुन को जर्मनी में 58वें बर्लिन फिल्म उत्सव में सिल्वर बीयर अवॉर्ड देकर सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म का खिताब दिया गया है। वहीं, गोल्डन बीयर अवॉर्ड मिला है रोमानिया की फिल्म ए नाइस डे टू गो टू द बीच को।
भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। पहले तो सिद्धार्थ की इस फिल्म ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने वाली पहली भोजपुरी फिल्म का रिकॉर्ड बनाया और अब पुरस्कार जीतकर इस फिल्म ने भोजपुरी सिनेमा में इतिहास रच दिया है।
सिद्धार्थ यूं तो हैं बंगाली लेकिन इस भाषा से गहरे लगाव के कारण उन्होंने भोजपुरी में इस फिल्म का निर्माण किया। सिद्धार्थ का कहना है कि आपके बचपन में या अबोध अवस्था में कुछ ऐसा होता है जो आपके दिमाग में बसा रह जाता है और जीवन के अगले पड़ाव में जाहिर होता है। यही हुआ, मेरा जन्म गाजीपुर में हुआ और फिर अबोध अवस्था में दिल्ली आना हुआ। तो, भोजपुरी का प्रभाव मेरे दिल-दिमाग पर रह गया।
फिलहाल एक हिंदी फिल्म के लिए कार्य कर रहे सिद्धार्थ का कहना है कि वे फिर भोजपुरी में फिल्म बनाने के लिए उत्सुक हैं। सिद्धार्थ ने अपनी फिल्म को अवॉर्ड मिलने पर भारतीयता और एफटीआईआई पर गर्व जाहिर किया। गौरतलब है कि भोजपुरी की पुरानी फिल्म नदिया के पार आज तक सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।
उधेड़बुन : 21 मिनट, निर्देशक : सिद्धार्थ सिन्हा, अभिनय : आलोक राजवड़े, स्वाति सेनगुप्ता, जसवंत दलाल, शुभांगी दामले।
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