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सोनी चैनल द्वारा बनाए गए प्रथम ‘इंडियन आइडल’ अभिजीत सावंत 2005 में देश के सर्वाधिक चíचत लोगों में से एक थे, पर छोटे पर्दे से हटते ही लोग उन्हें भूलने लगे। खैर, जल्दी ही अब वह बड़े पर्दे पर हीरो के रूप में नÊार आएंगे। वह इन दिनों निर्माता गोविंद सतनाम और निर्देशक हेमंत प्रभु की रोमांटिक थ्रिलर फिल्म ‘लॉटरी’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। मिलिए अभिजीत सावंत से:
सिंगर से एक्टर कैसे बन गए?
मुझे हीरो के ऑफर पिछले तीन सालों से लगातार मिल रहे थे, जब से मैं इंडियन आइडल बना था। लेकिन मैंने बचपन से सोते-जागते एक ही सपना देखा था, स्टार सिंगर बनना, जिस कारण मैंने उन सभी फिल्मों को ‘न’ कह दिया। मगर ‘लॉटरी’ की स्क्रिप्ट और मेरा रोल मुझे इतना पसंद आया कि इस बार इनकार नहीं कर पाया।
ऐसा क्या खास है आपके रोल में?
यह कैरेक्टर बिल्कुल वैसा है, जैसा मैं खुद हूं- गंभीर, शांत, अंतमुर्खी, कल्पना में खोया रहने वाला। यह लड़का एक फैशन मैग्Êाीन के ऑफिस में बतौर एकाउंटेट काम करता है। यह एक लड़की से प्यार करने लगता है, पर मुंह से कह नहीं पाता। उसका एकतरफा प्यार उसे बहुत कष्टकर है। तभी उसे अचानक कहीं से ढेर सारे पैसे मिलने लगते हैं। पैसा उसकी Êिांदगी को बदलकर रख देता है। चूंकि यह रोमांटिक-थ्रिलर-सस्पेंस फिल्म है, इससे Êयादा बताना ठीक नहीं रहेगा।
आपसे पहले सोनू निगम भी बतौर हीरो बनकर आए थे, पर कामयाब नहीं रहे!
लेकिन सिंगर-कंपोÊार हिमेश रेशमिया तो अपनी पहली ही फिल्म में कामयाब रहे और अब वह दूसरी फिल्म भी कर रहे हैं। किशोर (कुमार) दा तो इस मामले में बहुत बड़े उदाहरण हैं, जो सिंगर और एक्टर, दोनों ही रूप में समान सफल रहे। खैर, मुझे इस फिल्म में टिपिकल बॉलीवुड हीरो की तरह न तो बिल्ंिडग से कूदना है और न कमरतोड़ डांस करना है। मुझे लगा कि यह कैरेक्टर बखूबी निभा सकता हूं तो फिल्म कर ली। मेरा पहला प्यार हमेशा सिंगिग रहा है और रहेगा।
और अगर यह फिल्म सुपर डुपर हिट हो गयी तो..? तब भी गाना नहीं छोड़ूंगा। एक्टिंग भी करूंगा। साथ में बतौर एक्टर वे सारी चीÊों सीखूंगा, जिन्हें सीखने की Êारूरत है।
पहले दिन की शूटिंग के समय कैसा लगा? क्या नर्वस हुए थे?
देखिए, कैमरे का सामना करना मेरे लिए कोई नई बात नहीं थी। इंडियन आइडल की पर्फार्मेसेस के समय ही कैमरे का डर दिल से निकल गया था। उसके बाद स्टेज शो हो या रिकॉर्डिग, कैमरे मेरे साथी रहे हैं। लेकिन जब आपके सामने संजय नार्वेकर, मुकेश तिवारी जैसे मंजे हुए अभिनेता हों तो कांफिडेंस थोड़ा-सा लूÊा होना स्वाभाविक है। इसमें मेरी हीरोइन ऋचा गुजराती भी सीरियलों की मंजी हुई एस्ट्रेस हैं। मैं इन सबके सहयोग और मार्गदर्शन में अपना काम अपनी समझ से बेहतर से बेहतर करता आ रहा हूं।
प्रोडच्यूसर-डायरेक्टर से लेकर हीरो-हीरोइन तक सभी तो नए हैं। ऐसे में इस फिल्म का भविष्य क्या होगा?
नया कोई नहीं है, सबका इंडस्ट्री से बरसों का नाता है। डायरेक्टर-राइटर हेमंत प्रभु ‘कुंडली’, ‘कन्यादान’, ‘अंबर-धारा’ सहित 20 धारावाहिकों का निर्देशन कर चुके हैं। यह कहिए कि फिल्म में स्टार वैल्यू नहीं है। लेकिन अब तो सभी मानते हैं कि इन दिनों स्टार नहीं, कंटेट चलता है। फ्लॉप होने वाली मल्टी स्टारर फिल्मों और सुपर हिट होने वाली नॉन-स्टार फिल्मों के दर्जनों उदाहरण दिए जा सकते हैं।
बहरहाल, बतौर प्लेबैक सिंगर आपके लिए आपका इंडियन आइडल बनना बेकार गया। सहमत हैं न?
मैं सहमत नहीं हूं। अगर वह प्लेटफार्म न मिला होता तो मैं भी अपनी गली में, अपने बाथरूम में गाता रहता। कौन जानता अभिजीत सावंत को! मेरे प्रशंसक और शुभचिंतक मुझे बतौर प्लेबैक सिंगर जिस मकाम पर देखना चाहते हैं, मैं वहां जरूर पहुंचूंगा, पर उसमें थोड़ा समय लगेगा। कारण यह है कि फिल्म मेकिंग बड़ा ही महंगा व्यवसाय है, जिसमें सब लोग रिस्क नहीं ले सकते। लोग स्थापित और आजमाए हुए सिंगर्स से ही गवाना चाहते हैं। धीरे-धीरे जब मैं भी फिल्म मेकर्स और म्यूÊिाक डायरेक्टर्स का विश्वास जीत लूंगा, सब मुझे गवाने लगेंगे।
लेकिन बतौर प्लेबैक सिंगर तो आपकी चर्चा बिल्कुल भी नहीं हो रही है। आपने कब से कोई गाना रिकॉर्ड नहीं किया है?
(हंसकर) आप तो मजाक कर रहे हैं। हाल में इसी फिल्म ‘लॉटरी’ के सारे मेल सांग्स रिकॉर्ड किए हैं। तीन फिल्मों- ‘मुंबई डॉट कॉम’, ‘केयर ऑन फुटपाथ’ और ‘फायर’ की रिकॉर्डिग चल रही है। एक रिकॉर्डिग पूरी भी नहीं हो पाती है कि नया काम आ जाता है। आप यकीन करें या न करें, रिकॉर्डिग और स्टेज शोज के बाद इस फिल्म में एक्ंिटग के लिए बड़ी मुश्किल से व़क्त निकाल पाया हूं।
पिछले दिनों राखी सावंत ने म्यूÊिाकल कॉन्टेस्ट और टैलेंट हंट शोज में होने वाली एसएमएस वोटिंग की विश्वनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया था। क्या सचमुच वोटिंग में ऐसी बेईमानी होती है?
देखिए, एक बात सब जानते हैं कि हारने वाला अक्सर कोई आरोप लगाता है या अपनी कमजोरी छिपाने के लिए बहाने बनाता है। मुझे नहीं लगता कि कोई टीवी चैनल या मोबाइल नेटवर्क फर्जी मैसेजिंग वाली बेईमानी करके अपना नुकसान करेगा, क्योंकि चैनल को एसएमएस वोटिंग से पैसा मिलता है। बहरहाल, इंडियन आइडल के बारे में तो मैं दावा कर सकता हूं कि वहां बेईमानी की जरा भी गुंजाइश नहीं होती। कारण यह कि यह ‘अमेरिकन आइडल’ का एडॉप्टेड शो है और इस शो के हर संस्करण के दौरान मूल शो के अधिकारियों द्वारा नियुक्त एक अमरीकी यहां मौजूद रहता है, जो एक-एक गतिविधि पर नÊार रखता है।
खैर, अब विवाहित जीवन कैसा लग रहा है? आपकी लव मैरिज है या अरेंज?
अरेंज मैरिज ही कहना चाहिए, क्योंकि वह मेरी बहुत पुरानी फ्रेंड थी। हम दोनों के घरवालों ने मिलकर हमारी शादी तय की और विधिवत विवाह हुआ। शादी के बाद लगता है कि Êिांदगी में जो कमी-सी थी, वह पूरी हो गयी है।