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Indians Abroad Indians Abroad टोरंटो.
कैनेडा में हैलमेट की अनिवार्यता के कानून को लेकर विवाद थमता नहीं नजर आ रहा। एक पगड़ीधारी सिख बलजिंदर बादेशा के इस कानून को चुनौती देने से मामला और तूल पकड़ गया है। सरकार के बचाव में उतरे कैनेडा के स्टेट अटॉर्नीज ने दावा किया है कि सिख अपने पूरे इतिहास के दौर में हैलमेट पहनते रहे हैं।
उनका कहना है कि इस कानून को चुनौती देने वाले सिख को ऐसे हैलमेट का इस्तेमाल करना चाहिए जो पगड़ी पर फिट हो जाता है। या फिर उन्हें मोटरसाईकल के बजाय ट्रांसपोर्ट के दूसरे साधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। गौरतलब है कि 39 वर्षीय बादेशा का सितंबर 2005 में पुलिस ने तब चालान कर दिया था जब वह बिना हैलमेट के वह मोटरसाइकिल चला रहा था। इस पर बादेशा यह कहते हुए कोर्ट चला गया था कि यह कैनेडियन संविधान के तहत उसकी धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
बादेशा का दावा है कि यह सिखों के साथ भेदभाव है क्योंकि वे आस्था के तहत घर से बाहर हर वक्त पगड़ी पहनने के लिए बाध्य हैं। नैशनल पोस्ट अखबार ने यह जानकारी दी है।
ओंटारियो अटार्नी जनरल के प्रतिनिधि माइकल डोय ने ब्रैम्पटन कोर्ट से कहा कि यहां तक कि रुढ़िवादी सिख भी हर वक्त अपनी पगड़ियां नहीं पहनते। नहाते या सोते समय और स्विमिंग जैसी खेल गतिविधियों के वक्त भी पगड़ी नहीं पहनी जाती। डोय ने दावा किया कि ऐतिहासिक साक्ष्य भी दर्शाते हैं कि सिखों ने अपने इतिहास के पूरे दौर में हैलमेट पहना है। इस संदर्भ में उन्होंने रॉयल ओंटारियो म्यूजियम में डिसप्ले की गई 18वीं शताब्दी की एक सिख टर्बन हैलमेट का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कैनेडियन फोर्सेज में कार्यरत सिख भी ऑपरेशन गतिविधियों और ट्रेनिंग के दौरान अपनी छोटी पगड़ी या सिर ढंकने वाले कपड़ों के ऊपर हैलमेट पहनते हैं। सरकारी पक्ष की दलील थी कि बाजार में ऐसी बनावट के हैलमेट उपलब्ध हैं जो सबसे छोटी पगड़ी पर फिट हो सकते हैं।
डोय ने कोर्ट के सामने हैलमेट न पहनने पर हैल्थ केयर सिस्टम पर होने वाले खर्चे की एक स्टडी पेश की। इसमें दिखाया गया था कि ऐसी दुर्घटना में हुई क्रिटिकल हैड इंजरी के इलाज का खर्चा एक साल में 171000 डॉलर बैठता है। गंभीर हैड इंजरी से होने वाली विकलांगता पर पूरे जीवन भर का खर्चा तकरीबन 24 लाख डॉलर आता है।