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नियति का मजाक

सीकर.farm यह महज तीन किसानों के टूटे सपनों की कहानी नहीं है, बल्कि जिले के उन हजारों किसानों का दर्द है, जिनके अरमान पाले ने चकनाचूर कर दिए। पाला फसलों पर कहर बनकर टूटा तो करोड़ों रुपए की फसल तबाह हो गई। कृषि विभाग ने भी अपनी सर्वे में रिपोर्ट में 50 फीसदी फसल तबाह होनी बताई है। सबसे अधिक नुकसान सरसों की फसल और सब्जियों में हुआ है।

फसलें तबाह होने के कारण किसानों ने ट्रैक्टर चलाकर पूरी फसल उखाड़ डाली है। किसानों का कहना है कि पाले के कारण पूरी फसल खराब हो चुकी है, अब सिंचाई करके भी कोई फायदा तो होगा नहीं। भगतपुरा गांव में दर्जनभर किसानों ने जली फसलों को उखाड़ फेंकी। कृषि अधिकारी हरदेवसिंह बाजिया ने बताया कि ठंडी हवाओं व बर्फ ने फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया।

सरसों, चना व सब्जियों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। कृषि अधिकारों का कहना है कि फरवरी माह चने की फसल के लिए खास होता है, लेकिन इस माह पड़े पाले ने चने की फसल भी बर्बाद कर दी है। जानकारी के अनुसार जिले में सरसों की फसल 56550 हैक्टर में बोई गई थी, जिसमें से 50 फीसदी फसल तबाई हो गई। 31500 हैक्टर में बोए गए जौ में 22, चने में 20, मैथी में 20, सब्जियों में 50 फीसदी का नुकसान हुआ है।

अरमानों पर पाला

बानूड़ा गांव के अजरुनसिंह ने इस साल 20 बीघा पर सरसों की फसल उगाई थी। फसल के साथ कुछ अरमान भी बोए थे कि फसल की कमाई से अपने लड़के की शादी का। मगर उसे क्या पता था कि प्रकृति उसके साथ यह मजाक करेगी। अजरुन की आंखों से टपकते आंसू उसके दर्द को बयां करने के लिए काफी है। बानूड़ा के ही चौखाराम की बेटी की शादी अप्रैल में होनी थी।

हर बाप की तरह बेटी की शादी धूमधाम से करने के अरमान इस बार शायद ही पूरे हो पाए। 35 बीघा में बोई गई फसल पर पाला कहर बनकर टूटा। अब तो फसल के लिए लिया गया कर्जा बोझ बन गया है। खूड़ के मांगीलाल बताते हैं, 17 बीघा में सरसों की फसल पाले के कहर से जल जाएगी, कभी सोचा नहीं था। उन्होंने बताया कि खेत में ट्यूबवैल खुदवाने के सपने भी अब शायद पूरे हो पाए।

मुआवजे के लिए होगा प्रदर्शन

अखिल भारतीय किसान सभा जिला कमेटी ने कई गांवों का दौरा कर नष्ट हुई फसलों को मुआवजा देने की मांग की है। जिला सचिव सागर खाचरियां ने बताया कि किसानों की लाखों रुपए की फसलें पाले के कारण नष्ट हो गई है।

किसान सभा जिला मुख्यालय पर पाले से बर्बाद फसलों का मुआवजा देने, रबी फसल के सहकारी कर्जे माफ करने व पेट्रोल-डीजल का मूल्य कम करने आदि मांगों को लेकर 27 फरवरी को प्रदर्शन किया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव में जनसंपर्क भी किया जा रहा है। इसी तरह पंस किरडोली के सरपंच माफिया ने खराब हुई फसल की गिरदावरी रिपोर्ट तैयार कर मुआवजा देने की मांग की है।





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