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आशियानों पर चलेगा बुलडोजर!

इंदौर. नगर निगम ने बद्रीबाग कॉलोनी में बनाए रो-हाउस तोड़ने का आदेश रिमूवल अधिकारी को दे दिया है। इसकी जानकारी कॉलोनी में बसे 385 परिवारों के 1100 सदस्यों को मिली तो वे सदमे में आ गए। इसे बनाने वाले बोहरा समाज के पदाधिकारियों ने कहा गरीबों को मकान देने के लिए कुछ नियम टूटे हैं लेकिन इसमें कोई निजी हित नहीं है।

चोइथराम अस्पताल के पीछे बोहरा समाज के लिए बनी बद्रीबाग कॉलोनी में विकास प्राधिकरण द्वारा अलॉट अलग-अलग प्लॉट मिलाकर रो-हाउस बना दिए गए थे। प्राधिकरण अफसरों ने उन्हें तोड़ने के लिए निगम को पिछले साल ही लिख दिया था। महीनों तक वह आदेश दबा रहा और अंतत: रिमूवल अधिकारी को तोड़ने का कह दिया गया।

सिटी इंजीनियर हरभजन सिंह ने बताया रहवासियों को नोटिस पहले ही दिए जा चुके हैं इसलिए अब तोड़ने की कार्रवाई ही की जाएगी। प्लॉटों को जोड़कर रो-हाउस बनाना नियम विरुद्ध है। उधर, आदेश की जानकारी कॉलोनी में पहुंचते ही रहने वाले सकते में आ गए। दिनभर समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच बैठकों का दौर चलता रहा।

पांच महीने पहले रुक गई थी कार्रवाई
करीब पांच महीने पहले भी निगम ने इन्हें तोड़ने के आदेश रिमूवल निकाला था। तब बद्रीबाग हाउसिंग सोसायटी भी कोर्ट गई थी। किसी कारण निगम ने कार्रवाई रोक दी और सोसायटी ने भी कोर्ट केस वापस ले लिया।

जिंदगीभर का सपना कोई कैसे तोड़ेगा
बद्रीबाग के रहवासी हकीमुद्दीन हैदरी, अक्कामुद्दीन, हुसैन बैगवाले ने कहा स्वयं के घर का सपना देखने में आधे से ज्यादा जीवन कट गया। पूरी पूंजी लगाकर घर बनाया तो अधिकारी तोड़ने की बात करने लगे। सरकार ने तो घर दिए नहीं, समाज ने दिए तो तोड़ने की बात करने लगे। हमें नहीं पता कौन से नियमों की अवहेलना की। हम इतना जानते हैं अपना घर आंखों के सामने टूटता नहीं देख सकेंगे। कई आंखें तो यह सोचकर ही नम हैं।

समाज हित में टूटे नियम
बद्रीबाग कॉलोनी के प्रोजेक्ट इंचार्ज सैफुद्दीन खंबाती ने बताया यहां बसे 1100 लोगों बॉम्बे बाजार में बदहाल जीवन जी रहे थे। एक-एक कमरे में पांच-पांच सदस्य थे। उन्हें 93,000 से 1,25,000 रुपए के फ्लैट छह साल की किस्तों में दिए। उस पर भी कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा। फिर भी निगम अधिकारी जो करना चाहें करें।





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