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Chhattisgarh
Raipur Raipur जगदलपुर.
जेल में बंद कैदियों के लिए 1999 से लागू कल्याण योजना से कैदियों के परिजनों का तो नहीं, पर सरकार का भला जरूर हो रहा है। आठ सालों से कैदियों की कमाई सरकारी खजाने में है और अब तक इनका एक भी दावेदार सामने नहीं आया है।
कैदी-बंदी कल्याण योजना में कैदियों की कमाई के दो हिस्से होते हैं। आधा परिवार को देने का प्रावधान है और आधी रकम प्रभावित-पीड़ित लोगों को देना है। आठ सालों में कैदियों ने 53 लाख रुपए कमाए। इनमें से 10 लाख रुपए पीड़ितों को दिए जा चुके हैं, लेकिन कैदियों के परिजन अपनी राशि लेने सामने नहीं आए और न ही सरकार की ओर से कोई पहल की गई।
सेंट्रल जेल में दक्ष कैदियों की दिहाड़ी 15 और अकुशल की मजदूरी 12 रुपए तय है। कैदियों की संख्या के आधार पर हर माह जेल में डेढ़ लाख रुपए की रोजी कैदियों के हिस्से में आती है। जेल में छुट्टियों को छोड़कर आमतौर पर एक कैदी महीने में 300-350 रुपए कमाता है। इस तरह अब तक कैदियों के निजी खाते में करीब 43 लाख रुपए जमा हो चुके हैं।
क्यों नहीं आ रहे पैसा लेने : जेल में बहुत से ऐसे कैदी हैं, जिनके जघन्य अपराध की वजह से परिजनों ने किनारा कर लिया है या लोक लाज के कारण सामने नहीं आ रहे हैं। एक कारण यह भी है कि ज्यादातर लोगों को योजना का पता नहीं है।
कैदी कहते हैं : कत्ल के गुनाहगार दंतेवाड़ा के 80 वर्षीय कैदी परदेशी को इतना मालूम है कि उसकी कमाई का एक हिस्सा खजाने में जमा है। भले ही परिवार वाले पैसा नहीं ले गए, लेकिन उसे उम्मीद है कि जब वह रिहा होगा, पैसा जरूर मिलेगा और इस राशि से वह सम्मानजनक जिंदगी जिएगा।