HomeNewsChhattisgarhBilaspur Bilaspur

छग और मप्र में बांध लील रहे हैं जंगल को

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में वनों का बड़ा हिस्सा बांधों के पेट में समा गया है। ताजा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश के वन क्षेत्र में 132 वर्ग किलोमीटर और छत्तीसगढ़ में 129 वर्ग किलोमीटर की कमी हो गई है।

फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया के मुताबिक इस कमी का मुख्य कारण बांधों का निर्माण है। मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर बांध के निर्माण का असर हुआ है और छत्तीसगढ़ में बिलासपुर में चंपी नदी पर बांध बनाने से वन क्षेत्र में कमी आई है। मध्य प्रदेश में नर्मदा पर बांध बनाने से पूर्वी निमाड़, हरदा, देवास और शिवपुरी जिलों के वन क्षेत्र पर असर हुआ है।

यहां इंदिरासागर, ओंकारेश्वर ओर मडीखेड़ा परियोजनाएं चल रही हैं। पिछले फारेस्ट सर्वे में इस राज्य में 76,145 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र था। ताजा सर्वे में यह 76,013 वर्ग किलोमीटर हो गया है। छत्तीसगढ़ में पिछले सर्वे में वन क्षेत्र 55, 992 वर्ग किलोमीटर और इस बार यह सिमट कर 55,863 वर्ग किलोमीटर रह गया है।

फारेस्ट सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में वन क्षेत्र में 768 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। मध्य प्रदेश में सभी तरह के वनों में कमी आई है। घने जंगल में पहले से 12 वर्ग किलोमीटर, अपेक्षाकृत कम घने जंगलों के क्षेत्र में 56 वर्ग किलोमीटर और खुले वन क्षेत्र में 64 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है।

छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा कमी अपेक्षाकृत कम घने जंगलों में आई है। इन जंगलों में 248 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। लेकिन खुले वन क्षेत्र में 119 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि से थोड़ी भरपाई हो गई है।

माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में अवैघ कटाई : फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया के मुताबिक छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों पर माओवादी गतिविधियों का असर भी हो रहा है। इसके मुताबिक धमतरी, कवर्धा, कांकेर और बस्तर के वनों में अवैध कटाई के कारण वन क्षेत्र में कमी आ रही है।

फारेस्ट सर्वे के मुताबिक वन क्षेत्रों में कमी में वन विभाग भी योगदान कर रहा है। छत्तीसगढ़ में राजनंदगांव और महासमुंद में जंगल घट रहे हैं क्योंकि वन विभाग कटाई कर रहा है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: