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सलार जंग अजायब घर

सलार जंग अजायब घर सलार जंग अजायब घर एक ही व्यक्ति द्वारा इकट्ठी की गई एंटीक वस्तुओं का दुनिया का सबसे बड़ा संग्रह है। इसे बनाने में नवाब मीर यूसुफ अली खान सलार जंग ने अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा और 35 साल लगा दिए।

मूसी नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित सलारजंग म्यूज़ियम भारत का तीसरा सबसे बड़ा अजायबघर है, जिसमें एक व्यक्ति द्वारा एकत्रित दुनिया की सबसे •यादा एंटीक्स रखी गई हैं।

यहां पहली सदी से लेकर विभिन्न सभ्यताओं के बहुमूल्य अवशेष रखे गए हैं। यहां मुगल मिनिएचर्स, यूरोपियन पेंटिंग्ज़ और स्कल्पचर्स, चाइनीज़ पोर्सलेन, जापानी सिल्क पेंटिंग्ज़, गलीचे, घड़ियां, प्राचीन हस्तलेख इत्यादि रखे गए हैं।

नवाब मीर यूसुफ अली खान सलार जंग तृतीय (1889-1949), जो सातवें हैदराबाद निज़ाम के पूर्व प्रधानमंत्री थे, उन्होंने इस अमूल्य कलैक्शन को बनाने में अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा और ज़िंदगी के 35 साल खर्च कर दिए, हालांकि कुछेक वस्तुए उन्हें अपने पिता व दादा से विरातस में भी प्राप्त हुईं।

उनकी यह कलैक्शन उनके पैतृक महल ‘दीवान डच्योड़ी’ में प्राइवेट म्यूज़ियम के तौर पर थी, जिसका 1951 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उद्घाटन किया। बाद में 1968 में म्यूज़ियम को अफज़लगंज में शिफ्ट कर दिया गया, जहां यह वर्तमान में स्थित है।

म्यूज़ियम की बिल्डिंग सैमीसकरुलर शेप की है। इसकी दो मंजिलों पर 38 गैलरियां हैं, जिनमें से २क् ग्राउंड फ्लोर पर हैं और १८ फस्र्ट फ्लोर पर। यहां विभिन्न विषयों पर अलग-अलग गैलरियों में वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।

सलारजंग म्यूज़ियम में 43,000 से ज्यादा कलात्मक वस्तुएं और 50,000 पुस्तकें और हस्तलेख रखे हुए हैं। इस कलैक्शन में भारतीय कला, मध्यपूर्व कला, सुदुर पूर्व कला, यूरोपियन आर्ट, चिल्ड्रन आर्ट के अलावा फाउंडर्स गैलरी और दुर्लभ हस्तलेख सैक्शन शामिल हैं। भारतीय कला में स्टोन स्कल्पचर्स, तांबे की मूर्तियां, वुड कार्विग्ज़, पेंटिड टैक्सटाइल्स, मिनिएचर पेंटिंग्ज़, मॉर्डन आर्ट, हस्तलेख इत्यादि शामिल हैं।

मिडल ईस्ट आर्ट में पर्शिया, अरेबिया, सीरिया और मिस्र से लाए गए गलीचे, हस्तलेख, फर्नीचर और मैटल-वेयर हैं। सुदुर पूर्वी आर्ट में चीन, जापान, तिब्बत, नेपाल, थाईलैंड इत्यादि का पोर्सलेन, ब्रोंस, कढ़ाई, पेंटिंग्ज़ और वुडवर्क रखा गया है। यूरोपियन कलैक्शन में रखीं ऑयल व वाटर कलर पेंटिंग्ज़ देखने योग्य हैं। हैदराबाद शहर में स्थित इस अजायबघर को देखने हर साल क़रीब 10 लाख लोग आते हैं।





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