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एटीएम का ‘राज’ जानने का हक नहीं

नई दिल्ली. वक्त-बेवक्त धन की जरूरत पूरी करने वाली बैंकों की एटीएम मशीनों के बारे में अगर आप यह जानना चाहें कि आखिर यह काम कैसे करती है तो ऐसा मुमकिन नहीं है। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी बैंक को उसके यहां लगीं एटीएम मशीनों की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है।

देश के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एटीएम मशीनों की संचालन प्रणाली की जानकारी मांगने वाले एक आवेदन को खारिज करते हुए सीआईसी ने यह व्यवस्था दी है। आंध्रप्रदेश के कुनरूल निवासी जी रामचंद्र राव ने यह आवेदन सूचना के अधिकार के तहत दायर किया था। राव ने पहले एसबीआई से इस संबंध में विस्तृत जानकारी चाही थी, जिससे मना करने पर उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग को अपील की थी।

आयोग का निर्णय : सूचना आयुक्त पद्म बालसुब्रमण्यम ने अपने आदेश में कहा, ‘एटीएम की कार्यप्रणाली असल में व्यावसायिक गोपनीयता का मुद्दा है। इसमें उसकी सुरक्षा निहित है, इसलिए इस बारे में किसी बाहरी व्यक्ति को जानकारी नहीं दी जा सकती है।’

अनसुलझे सवाल : एटीएम में गड़बड़ी क्यों होती है? एटीएम के रखरखाव के बारे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक एसोसिएशन के क्या दिशा-निर्देश हैं।

क्यों जानना जरूरी है : कई बार एटीएम मशीन में से फटे या नकली नोट निकलते हैं, वहीं कई बार यह बताती है कि आपने रकम तो निकाल ली, लेकिन हकीकत में आपको राशि मिली ही नहीं होती है। ऐसे में आपको बैंक तक दौड़ लगानी पड़ती है।

क्या बताया बैंक ने : एसबीआई कुनरूल ब्रांच के जनरल मैनेजर ने राव के सवाल के जवाब में कहा कि एटीएम के रखरखाव या उसमें से अधिक राशि निकाले जाने के संबंध में आरबीआई या आईबीए के कोई विशेष दिशा-निर्देश नहीं हैं। एटीएम से नोट निकलने में गड़बड़ी के बारे में केवल संबंधित ग्राहक को ही जानकारी दी जा सकती है, किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं।





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