नई दिल्ली.
सरकार बैंकिंग कैश ट्रांजैक्शन टैक्स (बीसीटीटी) की बजट 2008-09 में समीक्षा कर सकती है या इसे समाप्त कर सकती है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार किसी व्यक्ति या फर्म के बचत खाते से 50,000 रुपए से ज्यादा नकद निकालने पर 0.1 बीसीटीटी लागू होता है। इस टैक्स का प्रावधान अघोषित धन के लेन-देन पर निगाह रखने के लिए किया गया था। अब सालाना इंफर्मेशन रिपोर्ट (एआईआर) के तहत विस्तार की संभावना है। वित्त मंत्री ने पिछले बजट में कहा था कि बीसीटीटी की समीक्षा की जा सकती है।
औद्योगिक संगठन फिक्की ने वित्त मंत्री से आग्रह किया है कि ज्यादा राशि के जितने भी लेन-देन होते हैं, उनमें पेन कार्ड का इस्तेमाल होता है, इसलिए अब इस टैक्स की कोई जरूरत नहीं रही है। आयकर विभाग बड़ी राशि के लेन-देन पर अलग से सूचनाएं हासिल कर रहा है।
क्या कहता है आयकर विभाग:
सालाना करीब 3 करोड़ रिटर्न दाखिल होते हैं, उसमें से एक-डेढ़ फीसदी का परीक्षण आयकर विभाग करता है। इसके अलावा 350 छानबीन और 10,000 सर्वे किए जाते हैं। जनवरी तक बीसीटीटी से विभाग को 460 करोड़ रुपए की आय हुई है। करीब 1,000 करोड़ रुपए की कर चोरी बचाने में भी इसने भूमिका अदा की है। विभाग का कहना है कि इसलिए बीसीटीटी को हटाने का यह सही वक्त नहीं है।
पिछले बजट में वित्त मंत्री ने केंद्र व राज्य सरकारों के लेन-देन इससे मुक्त कर दिए थे, वहीं लिमिट बढ़ाकर 50,000 रुपए से ज्यादा कर दी थी।
...क्या हो सकता है-
* बैंक से 50,000 रुपए से ज्यादा की निकासी को एआईआर के तहत लाया जा सकता है।
* बैंक कैश ट्रांजैक्शन टैक्स की समीक्षा हो सकती है या इसे खत्म किया जा सकता है।