जोधपुर.
इस रेल बजट को लेकर मारवाड़ फिर आशान्वित है। हालांकि रेल विस्तार को लेकर पिछले कई बजटों से क्षेत्र के हिस्से मायूसी आ रही है। यूपीए सरकार के कार्यकाल के आखिरी रेल बजट में मारवाड़ के हाथ क्या लगेगा? यह तो एक हफ्ते बाद सामने आएगा, लेकिन नई रेललाइनों, आमान परिवर्तन और मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने से लेकर एक्सटेंशन तक दर्जनों प्रस्ताव पहले ही मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
सबसे अहम प्रस्ताव जैसलमेर से कांडला तक नई रेललाइन का है, जिसे यदि मंजूरी मिलती है तो इससे पश्चिमी सीमा के समानांतर रेलवे की भी नई पंक्ति बन जाएगी। यह रेलमार्ग सुरक्षा कारणों से जितनी अहमियत रखता है, व्यापार के नए रूट के रूप में भी कई फायदे होंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिलाड़ा-बर को जोड़ने का है। इससे जोधपुर सीधे अजमेर होते हुए मध्यप्रदेश तक जुड़ जाएगा। क्षेत्र के सांसदों ने भी रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए अपने सुझाव रेलवे बोर्ड को भेजे हैं।
उम्मीद जगाई और भूल गए
जैसलमेर-सानू वाया हमीरा नई रेललाइन
यह परियोजना क्षेत्र के खनन व्यवसाय की प्रगति के लिए प्रस्तावित की गई थी। इसके महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री ने रेलमंत्री से दो बार पत्र लिखकर इस रेललाइन को शीघ्र पूरा करने की मांग की, लेकिन केंद्र सरकार ने प्रस्ताव ही लौटा दिया।
जैसलमेर से कांडला नई लाइन
जैसलमेर से कांडला नई बड़ी लाइन का सर्वे 2005-06 में पूरा हो चुका है। सर्वेक्षण रिपोर्ट में 562.50 किमी लंबी लाइन के निर्माण की लागत 991.39 करोड़ रुपए निर्धारित की गई थी। बजट के अभाव में यह योजना आगे नहीं बढ़ी।
जोधपुर-तिरुअनंतपुरम रेलसेवा
रेलमंत्री के इस प्रस्ताव पर रुचि नहीं दिखाने से यह प्रस्ताव केवल कागजों तक ही सीमित रहा। हालांकि राज्य सरकार ने रेलमंत्री को 19 जून 04 और 23 फरवरी 05 को पत्र लिखकर इन रेलसेवाओं को शुरू करने की मांग की।
एक्सटेंशन की दरकार
- बाड़मेर-गुवाहाटी ट्रेन को डिब्रूगढ़ तक
- जयपुर-सियालदाह एक्सप्रेस (साप्ताहिक) को जोधपुर से चलाया जाए
- जम्मू तवी-जोधपुर-अहमदाबाद ट्रेन को सोमनाथ एक्सप्रेस को द्वारका तक बढ़ाया जाए
- राजधानी एक्सप्रेस को सप्ताह में तीन दिन वाया जयपुर-जोधपुर चलाया जाए
- जोधपुर-हरिद्वार एक्सप्रेस को देहरादून तक बढ़ाया जाए
- जोधपुर-चेन्नई सप्ताह में दो दिन रामेश्वरम तक चलाई जाए
- भुज-बरेली एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन वाया जोधपुर चलाई जाए
इसलिए हैं अपेक्षाएं
मारवाड़ के लोग व्यापार और सरकारी व कॉपरेरेट सेवाओं में देश के कोने-कोने में रहते हैं। साथ ही जोधपुर की प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों को देखने दुनियाभर से सैलानी यहां आते हैं। जोधपुर सैंडस्टोन, हैंडीक्राफ्ट व परंपरागत टेक्साइल्स के खरीदारों की आवाजाही सूर्यनगरी स्टेशन से होती है। राजस्व के मामले में भी जोधपुर मंडल अव्वल है। लिहाजा अन्य राज्यों से रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने की जरूरत बनी हुई है।
इनका कहना है
रेल बजट में बिलाड़ा-बर और जैसलमेर-कांडला समेत कुछ नई रेललाइनों का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि इनका सर्वे पूरा हो चुका है, लेकिन बजट नहीं मिलने से ये योजनाएं आगे नहीं बढ़ पाई हैं। पुणो ट्रेन को स्थायी करने, चेन्नई, गुवाहाटी समेत कई ट्रेनों के फेरे बढ़ाने के साथ कुछ ट्रेनों को बढ़ाने के प्रस्ताव भी रेलमंत्री को भेजे गए हैं।
-जसवंतसिंह विश्नोई, सांसद
यह है जरूरत
बिलाड़ा-बर रेल मार्ग जुड़े तो अजमेर से सीधा संपर्क होगा।
जोधपुर-अहमदाबाद मार्ग का दोहरीकरण होता है तो दक्षिण के यातायात का दबाव कम होगा।
मावली- मारवाड़ जंक्शन लाइन को बड़ी लाइन से जोड़ने की सूरत में मेवाड़ और आगे मध्यप्रदेश तक जुड़ाव संभव।
दईजर से बनाड़ नई लाइन स्वीकृत होने पर जैसलमेर से आने वाली रेलों के लिए नया बाइपास तैयार होगा।
यहां से जुड़े तो बने बात
अमृतसर से मुंबई वाया बीकानेर-जोधपुर-अहमदाबाद ट्रेन चलाकर इन शहरों को जोड़ा जाए।
बलसाड-जोधपुर के बीच नियमित ट्रेन।
जोधपुर-बेंगूलर के बीच रोजाना ट्रेन।
जोधपुर-मुंबई के बीच नियमित सुबह की ट्रेन।
थोड़ा चले, फिर अटके
यह था प्रस्ताव : बिलाड़ा-बर-पीपाड़ को जोड़ना
कहां अटका : पीपाड़ रोड-बिलाड़ा खंड आमान परिवर्तन (लंबाई 41.14 किमी) का काम पूरा हो गया है। इस पर कुल 33.44 करोड़ की लागत आई है। नई लाइन पर ट्रायल होने के बावजूद मार्ग को यात्री सेवाओं के लिए नहीं खोला गया है। बर-बिलाड़ा (51 किमी) नई लाइन की सर्वे रिपोर्ट 16 फरवरी 07 को भेज दी गई थी, लेकिन बजट के अभाव में योजना अटकी हुई है।
यह था प्रस्ताव : जैसलमेर से नागौर एवं बीकानेर को फलौदी-नागौर एवं कोलायत से जोड़ना।
कहां अटका : वर्ष 2004-05 के रेल बजट में इस नई रेल लाइन का सर्वेक्षण शामिल किया गया था, लेकिन यह योजना फाइलों में दफन होकर रह गई। इस मामले में राज्य सरकार ने रेल मंत्री से पत्र व्यवहार कर इस रेल लाइन का सर्वेक्षण शीघ्र पूरा करने व बजट आबंटन की मांग की थी। कोलायत-फलौदी (112 किमी) नई रेल लाइन पर ट्रेनें दौड़ने लगीं, लेकिन शेष काम होना बाकी है।
यह था प्रस्ताव : अजमेर से मेड़ता रोड
कहां अटका : अजमेर-पुष्कर के बीच नई लाइन के निर्माण को 2000-01 के रेल बजट में शामिल करने के बाद सर्वेक्षण किया गया। अब तक 117.55 हैक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। इसके लिए 10 करोड़ की राशि आबंटित होने के बावजूद लाइन का शेष भाग पुष्कर से मेड़ता रोड़ जोड़ने का काम अटका हुआ है।