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पंचायतराज के आश्रितों को नौकरी देने की कवायद

बीकानेर. पंचायतराज विभाग के मृतक आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां देने की कवायद शुरू कर दी गई है। पंचायतराज के मृतक कर्मचारियों के आश्रितों के चार सौ से अधिक प्रकरण पिछले एक साल से शिक्षा विभाग में लंबित पड़े हैं। इन आश्रितों को कनिष्ठ लिपिक और चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों के पदों पर नियुक्तियां दी जानी है। इस संबंध में हाल ही में जयपुर में शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई थी।

आयुक्तालय सूत्रों के अनुसार स्नातक की योग्यता रखने वाले आश्रितों को ग्राम सेवक के पदों पर तथा दसवीं पास को कनिष्ठ लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पदों पर नियुक्तियां देने के प्रस्ताव का कार्मिक विभाग को भेजे गए हैं। राज्य में पंचायतराज की सेवा में कार्यरत कार्मिकों के आश्रितों की नियुक्तियां लंबे समय से बाधित हैं।

पंचायत समितियों में कनिष्ठ लिपिक और चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पद नहीं होने के कारण चार सौ से अधिक आशार्थी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। पूर्व में यह नियुक्तियां नियमों की विसंगतियों के कारण रुकी रही। राज्य में पंचायतराज संस्था में एलडीसी की योग्यता 10 + 2 पास रखी गई थी, जबकि अन्य विभागों में दसवीं पास को ही एलडीसी लगाया जाता है।

राज्य सरकार ने अगस्त 2005 में संशोधन करके पंचायतराज नियमों में एलडीसी की योग्यता दसवीं पास कर दी थी, जिससे इस योग्यता वाले आश्रित भी नियुक्ति के पात्र हो गए। बीएड या बीएसटीसी ट्रेंड आश्रित को तो शिक्षक के पदों पर नियुक्ति दी जा रही है लेकिन एलडीसी और चतुर्थश्रेणी पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पा रहीं।

अनुकंपा नियुक्तियों की पत्रावली पिछले कई महीनों से प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा आयुक्तालयों के बीच फुटबाल बनी हुई थी। पंचायतराज कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिलने के कारण शिक्षा विभाग इन कर्मचारियों के संबंध में निर्णय नहीं ले पा रहा था। पंचायतराज के मृतक आश्रित बीएड और बीएसटीसी योग्यताधारी को तो विभाग में नियुक्ति दी जा रही है लेकिन कर्मचारियों के पदों पर नहीं।

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पूर्व में यह लिख दिया था कि उनके यहां पद ही रिक्त नहीं है इसलिए इन अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं दी जा सकती। लंबी कसरत के बाद पंचायतराज विभाग की बैठक में नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किए गए हैं।

इस विषय पर चर्चा हो चुकी है। निर्णय राज्य सरकार करेगी। हालांकि डीओपी को प्रस्ताव भेज दिए गए हैं।
-पुरुषोत्तम बियाणी, उप सचिव, पंचायत राज विभाग (प्रारंभिक शिक्षा)





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