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जल बर्बादी, ‘संकट’ की दुहाई

बीकानेर.cartoon जलदाय विभाग की पुख्ता मोनीटरिंग के अभाव में प्रतिदन भारी मात्रा में पानी गंदे नालों में बह रहा है। इस स्थिति पर अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले गर्मी के सीजन में बीकानेर में पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा। कुओं के लगातार गिरते स्तर के कारण जनता के लिए फिलहाल नहरी पानी ही सहारा है लेकिन अगले महीने नहर बंदी भी होने वाली है। ऐसी स्थिति में प्रतिदिन व्यर्थ बहने वाले पानी की अहमियत बढ़ जाती है।

बीछवाल एरिया, समतानगर, भुट्टों का चौराहा, पुलिस लाइन चौराहा, पूगल रोड, जैसलमेर रोड आदि ऐसे स्थान है जहां पर जलदाय विभाग के वाल्व लगे हुए है और प्रतिदिन पानी की नियमित आपूर्ति के बाद भी 24 घंटे इनमें पानी व्यर्थ बहता रहता है। हैरानी की बात तो यह है कि एक ओर जहां जलदाय विभाग लीकेज व्यवस्था को सुधारने के लिए दावे करता है वहीं इन वाल्व पर उसकी नजर ही नहीं जाती।

लगातार लीकेज रहने वाले यह वाल्व कई लोगों के लिए फायदे का सौदा साबित होते है क्योंकि उनको बिना बिल चुकाए पानी मिल जाता है। भुट्टों के चौराहे पर तो ऐसे ही एक लीकेज वाल्व के पानी से निर्माण कार्य हो रहा था। यह तो केवल वाल्व का नजारा है। शहरी क्षेत्र में आज भी ऐसे कई मोहल्ले और चौक है जहां पर दशकों पुरानी पाइपलाइन बिछी है जो आए दिन लीकेज का शिकार रहती है।

विभागीय अधिकारियों को शिकायत करने, कर्मचारियों के आने और लीकेज को ठीक करने के दौरान हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। इतना ही नहीं शहरी क्षेत्र में कई जगह नालों के बीच या फिर उनके ऊपर से पाइपलाइन बिछी हुई है। पारीक चौक क्षेत्र में ऐसे ही प्रकरण पर गत दिनों विभागीय अधिकारियों को क्षेत्र के लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा था।

जलदाय विभाग को शहरी क्षेत्र में पुरानी पाइपलाइन बदलने के लिए एक करोड़ 20 लाख रुपए से अधिक की राशि भी स्वीकृत हुए है लेकिन किन-किन क्षेत्रों में यह कार्य होगा, इस पर अभी सर्वे ही चल रहा है। विभाग के एसई महासिंह बेनीवाल का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में तो कार्य शुरू हो चुका है और कुछ में शीघ्र ही इसे प्रारंभ कर दिया जाएगा।





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