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मौसम बेईमान है बड़ा..फ्लाईट रोको

उदयपुर. बादलों से ढका आकाश, अलसाई सूर्य किरणों और बारिश की बूंदे किसी कवि की कल्पना को पंख लगा देती है। आम जन मस्त मौसम में पिकनिक की प्लानिंग करते हैं लेकिन एक महकमा ऐसा होता है जिनके लिए सुहाना मंजर टेंशन बढ़ा देता है और वे गुलाबी रंग के पेपर में स्पेशल रिपोर्ट जारी करते हैं। यह महकमा है मौसम विभाग का जो हर आधे घंटे में मौसम के मिजाज को ना केवल भांपता है बल्कि एयरपोर्ट अथोरिटी को रिपोर्ट करता है।

बिना मौसम विभाग के क्लीन चिट के एयरपोर्ट से ना कोई विमान उड़ान भर सकता है ना ही उतर ही सकता है। जानकर अचरज होगा कि मौसम विभाग की रिपोर्ट पर लेकसिटी में कई बार फ्लाइट्स लेट की जाती हैं। औसतन एक दिन में एक से दो बार स्पेशल रिपोर्ट बनती है जिससे मौसम साफ नहीं रहने की सूचना दी जाती है।

कागज का रंग ही मिजाज का प्रतीक

मौसम सामान्य होने की स्थिति में जो रिपोर्ट जारी होती है वह सफेद रंग का कागज पर होता है जबकि स्पेशल रिपोर्ट जिसमें मौसम को फ्लाईट लेंडिंग या टेक ऑफ के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, उसे गुलाबी रंग के कागज पर जारी किया जाता है। हर आधे घंटे की अवधि में मेट रिपोर्ट जाती है जिसमें वातावरण में वायु दबाव व गति, विजीबिलिटी यानी दृष्टि साफ होना, आसमान में बादल आदि का विवरण होता है।

मौसम विभाग, डबोक के कार्यालय प्रभारी मांगीलाल खटीक ने बताया कि हर आधे घंटे में एयर ट्रेफिक कंट्रोल कार्यालय को रिपोर्ट देने के लिए कर्मचारियों को बीस-बीस मिनट का समय लगता है। ड्यूटी पर तैनात व्यक्ति सभी उपकरणों को चैक करने के बाद रिपोर्ट जारी करता है और दस मिनट के ब्रेक के बाद अगले आधे घंटे की रिर्पोटिंग में जुट जाता है।

शहर का मौसम भांपने के दस पैमाने

शहर का मौसम साफ है या नहीं। आंधी-बरसात आदि की वजह से आवागमन प्रभावित हो सकता है-इसे जानने के लिए कुछ पैमाने निर्धारित हैं। मौसम विभाग के आरसीए परिसर स्थित सॉइल मोइश्चर ऑबसरवेट्री में सनशाइन रिकार्डर, विंडवेंस (वायु दिशा मापक), कप काउंटर एनीमोमीटर(वायु गति), बड़े व छोटे थर्मोमीटर स्क्रीन, रेन गेज (वर्षा मापक यंत्र), ड्यू गेज स्टेंड, ओपन पेन इवेपोरेशन आदि दस उपकरण लगे हैं जो शहर में मौसम के मिजाज को जानते हैं।

नजर आया सज्जनगढ़-माछला मगरा तो मौसम साफ

ऑबजरवेट्री के साइंटिफिक ऑफिसर महेश आचार्य ने बताया कि केन्द्र से चारों दिशाओं में दिखाई देने वाले चुनिंदा भवनों व पहाड़ियों को एयर डिस्टेंस के आधार पर पैमाना माना गया है। पश्चिम में आरसीए की लाइब्रेरी 50 मीटर, प्रशासनिक भवन 200 मीटर, नोर्थ वेस्ट नोर्थ में 500 मीटर दूरी पर अशोकनगर का जैन मंदिर, नोर्थ वेस्ट में हजार मीटर दूरी पर चेटक सर्कल का टॉवर, दो किलोमीटर दूर वेस्ट में होटल लक्ष्मीविलास, साउथ वेस्ट में 2 किमी दूरी पर करणी माता मंदिर-माछला मगरा, चार किमी दूर वेस्ट दिशा में सज्जनगढ़ पैलेस व उत्तरी दिशा में 6 किमी रेंज पर पहाड़ियों का विजन चैक किया जाता है। रोज कर्मचारी इन दिशाओं में विजिबिलटी चैक करता है और यदि साफ नजर आता है तो मौसम को क्लीन चिट मिल जाती है।

डबोक की तुलना में कूल है उदयपुर

डबोक समुद्र तल से 516 मीटर ऊंचाई पर स्थित है जबकि उदयपुर सी-लेवल से 582.2 मीटर पर है। ऊंचाई के इस अंतर से उदयपुर कूल स्टेशन बना रहता है। जब मौसम में परिवर्तन होता है तो डबोक की तुलना में उदयपुर शहर में 2 से तीन डिग्री तक तापमान कम होता है। मौसम स्थाई होने के बाद यह फर्क केवल 0.5 डिग्री का रह जाता है।





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