HomeNewsRajasthanUdaipur Udaipur

बिजली इंजीनियरों को लगे मैनेजमेंट के झटके

उदयपुर. काम का दबाव तथा मैनेजमेंट की प्रताड़नाओं से क्षुब्ध अजमेर विद्युत वितरण निगम के इंजीनियर नौकरियां छोड़ने लगे हैं। तीन आला अधिकारियों द्वारा स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने के नोटिस देने के बाद कंपनी के 100 इंजीनियर भी सरकारी नौकरी छोड़ने का मन बना चुके हैं। प्रबंधन की प्रताड़ना से क्षुब्ध उदयपुर के अभियंताओं ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में रोष जाहिर किया।

पटेल सर्कल स्थित एवीवीएनएल के अतिथि घर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कंपनी के सीएमडी एस.आर.बंसल के व्यवहार की आलोचना की। बंसल ने कंपनी के तीन आला इंजीनियरों को काम करने में असक्षम कहा था जो स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने के नोटिस दे चुके हैं। झुंझुंनू के चीफ इंजीनियर विजयकरण असावा, एसई आर.के.मित्तल तथा अजमेर के चीफ इंजीनियर पी.के.बोगावत ने स्वैच्छिक सेवानिवृति का आवेदन दिया था।

इंजीनियर भड़के

कंपनी सीएमडी बंसल की टिप्पणी पर उदयपुर संभाग के इंजीनियरों ने रोष जताया। आरएसईबी इंजीनियर्स एसोसिशन के अध्यक्ष ए.के.झा तथा वी.के.झंवर के नेतृत्व में एकत्र इंजीनियरों ने बंसल की टिप्पणी को अनुचित एवं अमर्यादित बताया। झा ने कहा कि सेवानिवृति लेने वाले अधिकारियों ने नोटिस में घरेलू वजह से नौकरी छोड़ने की टिप्पणी की है। ऐसे में उन्हें अक्षम कहना द्वेषपूर्ण, दुर्भावना पूर्ण एवं पूर्वाग्रहों से ग्रस्त कार्यवाही है।

बैठक में इंजीनियर देवेंद्र कुमार परमार, पुरुषोत्तम पालीवाल, एम.एस.झाला, एन.के.भारद्वाज, आलोक जैन, पी.एन.त्रिवेदी, आर.एल.वीरवाल, एस.के.शर्मा, एसएस बड़ाला, ए.एल.जैन, राजेश जैन, आई.एम.मंसूरी, जे.एस.पाराशर, के.के.बंसल, सुरेश मेहता, गोविंद इंटोदिया, दिनेश सिंह, राजेश जैन, मनोज सुहालका, एम.एल.शर्मा उपस्थित थे।

400 इंजीनियर छोड़ चुके हैं नौकरी

बिजली इंजीनियरों का कहना है कि मैनेजमेंट द्वारा किए जा रहे शोषण से त्रस्त होकर राज्य की पांचों बिजली कंपनियों के 341 इंजीनियर्स तथा 60 लेखाधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृति ले चुके हैं। 100 इंजीनियर नौकरी छोड़ने को तैयार बैठे हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष ए.के.झा ने पत्रकारों को बताया कि निजी क्षेत्र की कंपनियां एवीवीएनएल में मिल रही पगार से ढाई गुना वेतन पर अनुभवी इंजीनियरों को रखने को तैयार हैं।

काम का बोझ

झा तथा झंवर ने बताया कि काम के बोझ से बिजली इंजीनियर खुद को तनावग्रस्त महसूस कर रहे हैं। अब इंजीनियरों की जवाबदारी पावर सप्लाई तक ही सीमित नहीं है। नए कनेक्शन देना, पुरानी बाकियात वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटना, लाइन फॉल्ट दुरुस्त कराना, जीएसएस ट्रांसफार्मर व फीडर्स का रखरखाव, राजस्व वसूली तथा बिजली की चोरी व छीजत रोकना रोजमर्रा के कामों में शामिल हैं।

रुटीन कामों के अलावा फीडर रिनोवेशन प्रोग्राम, अरबन फोकस प्रोग्राम, इंडस्ट्रीयल ॅफोकस, एपीडीआरपी प्रोजेक्ट, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम तथा हरिजन बस्ती विद्युतीकरण योजनाओं के काम भी सब डिवीजनों में तैनात एईएन, जेईएन को झेलने पड़ रहे हैं।

पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष शक्तिसिंह यादव एवं महासचिव रामकुमार सिंह राठौड़ ने अजमेर डिस्कॉम की सेवाओं से सेवानिवृति ले रहे वरिष्ठ अभियंताओं को सीएमडी एसआर बंसल द्वारा अक्षम कहने की भत्र्सना की है। आरएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव बीएल जाट ने भी सीएमडी की टिप्पणी को निंदनीय बताया।

मेरी कही गई बात का गलत अर्थ निकाला गया है। मुझसे तीन वरिष्ठ इंजीनियर्स के एक साथ काम छोड़ने की वजह पूछी गई थी। मैंने कहा था कि वे निजी कारणों से रिटायर होना चाहते हैं। अगर काम को बोझ मानकर छोड़ रहे हैं तो इसे अक्षमता ही माना जाएगा। सबसे ज्यादा काम का बोझ मुझ पर है। इसके बावजूद मैं काम छोड़कर नहीं भाग रहा हूं।
एस.आर. बंसल, सीएमडी, अजमेर डिस्कॉम





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: