लंदन. जल्द ही टूटी हड्डियों और क्षतिग्रस्त कार्टिलेज को खुद रोगी की स्टेम सेल की मदद से ठीक किया जा सकेगा। इस दिशा में ऐडिनबरा यूनिवर्सिटी में काम चल रहा है।
वैज्ञानिकों ने इस इलाज को बायो एक्टिव स्कैफोल्ड का नाम दिया है। इसमें गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के खून या बोन मैरो से स्टेम सेल लेकर उन्हें इच्छित हड्डी या टिश्यू में उगाया जाता है। असल में स्कैफोल्ड सख्त जाली की तरह की संरचना होती है जिस पर दवाओं का लेप लगा होता है। ये दवाएं स्टेम सेल को पकड़ बनाने में मदद करतीं हैं। प्रमुख शोधकर्त्ता डॉ. ब्रैनडन के मुताबिक इससे सर्जरी की जरूरत नहीं रह जाएगी।
अगर यह तकनीक सफल होती है तो ऑस्टियो आर्थराइटिस रोग में शरीर के जोड़ बदलने की जरूरत नहीं रह जाएगी। इससे बुजुर्ग को तो राहत मिलेगी साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में टूटी हड्डियों का भी आसानी से इलाज हो सकेगा।