आधुनिक युग के अभिशापों में से एक है ह्रदय रोग। यह समस्या इंसान को ज्यादातर तभी घेरती है जब व्यक्ति आरामतलब जीवनशैली अपना लेता है।
मरीज जब होश में न हो
>> उसके श्वसन पर नजर रखें। >> मरीज को जमीन पर या बिना गद्दे वाले पलंग पर सीधा लिटा दें। >> उसके कपड़े ढीले कर दें, खोल दें।
>> उसकी जुबान के नीचे सोर्ब्रिटेट, एस्प्रिन एवं डिस्प्रिन या अन्य एनालजेसिक या दर्द निवारक गोली रख दें। >> कमरे के दरवाजे एवं खिड़कियां खोल दें तथा मरीज के आसपास भीड़ न होने दें, ताकि मरीज को ताजी हवा मिलती रहे। >> मरीज की टांगों को ऊपर उठाएं, ताकि उसके हृदय एवं मस्तिष्क तक खून पहुंच सके। >> अगर नब्ज धीमी चल रही हो या नहीं चल रही हो, तो बिना समय गंवाए कार्डियो प्लमोनरी रिसस्सिटेशन आरंभ करें। क्या करें
>> मरीज को तत्काल लिटा दें। >> अगर नब्ज़ चल रही हो, तो मरीज को स्ट्रेप्टोकाइनेस या यूरोकानेस नामक दवाई का इंजेक्शन दें। >> मरीज की नब्ज एवं श्वसन पर निगरानी रखें। अगर नब्ज़ नहीं चल रही हो, तो उसकी तत्काल सीपीआर आरंभ करें और तब तक जारी रखें जब तक कि अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में नहीं पहुंच जाएं। >> अगर मरीज उल्टी कर रहा हो, तो उसके मुंह को एक तरफ मोड़ दें। उसके मुंह को खोल दें और जीभ बाहर निकाल दें।
क्या नहीं करें >> मरीज को खड़ा करने या बिठाने की कोशिश न करें। >> उसके मुंह में पानी या गंगाजल नहीं डालें। >> उसके आसपास भीड़ इकट्ठी नहीं करें। >> उससे ऐसी बात नहीं करें, जिससे उसकी निराशा बढ़े। >> मरीज को सामान्य चिकित्सक के पास न ले जाकर उसे हृदय चिकित्सा की सुविधाओं से सम्पन्न अस्पताल में ले जाएं।