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कॉरेस्पांडेंस से डिग्री लेने वाले टीचर्स की प्रमोशन पर रोक

चंडीगढ़.हरियाणा में कॉरेस्पांडेंस से डिग्री कोर्स कराने के लिए खुली शिक्षा की दुकानों पर जल्द शिकंजा कसा जाएगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कॉरेस्पांडेंस से दूसरे राज्यों की यूनिवर्सिटियों से डिग्री लेने वाले हरियाणा के स्कूल टीचर्स के जूनियर लैक्चरर के पदों पर तरक्की पर रोक लगा दी है।

हरियाणा एजूकेशन डिपार्टमेंट की ओर से लगभग 50 स्कूल टीचरों को जूनियर लैक्चरर प्रमोट किया जाना था। ये ऐसे टीचर हैं, जिन्होंने सर्विस में रहते हुए बाहर की यूनिवर्सिटीज से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। फिलहाल वही अध्यापक इस दायरे में आएंगे जिन्होंने विनायक मिशन यूनिवर्सिटी तमिलनाडु, बेंगलूर यूनिवर्सिटी बेंगलूर, जेआरएन विद्यापीठ उदयपुर राजस्थान, सरदार शहर यूनिवर्सिटी (राजस्थान) से पोस्ट ग्रेजुएशन की है। इसके अलावा हाईकोर्ट ने डिस्टेंस एजूकेशन काउंसिल (डेक) से हरियाणा में संचालित ऐसे संस्थानों की सूची मांगी है, जिन्होंने डेक से अनुमति लेकर डिस्टेंस कोर्स कराने वाली यूनिवर्सिटीज के स्टडी सेंटर खोले हैं।

चीफ जस्टिस विजेंद्र कुमार जैन और जस्टिस केएस आहलूवालिया की खंडपीठ ने यह आदेश सिरसा जिले के स्कूल टीचर करतार सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद दिए हैं।

कौन चला सकता है यूनिवर्सिटी का स्टडी सेंटर

बाहर की किसी भी यूनिवर्सिटी का स्टडी सेंटर चलाने के लिए सेंटर के प्रबंधकों को डिस्टेंस एजूकेशन काउंसिल (डेक) से अनुमति लेनी पड़ती है। बिना अनुमति चलने वाले सेंटर के जरिए हासिल डिग्री के बलबूते पर उम्मीदवार सरकारी नौकरी के योग्य नहीं होंगे, भले ही उन्होंने मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल की हो।

हरियाणा में हैंैं हजारों स्टडी सेंटर

राज्य में इस वक्त हजारों स्टडी सेंटर खुले हुए हैं जो एमफिल, एमए, बीए और इंजीनियरिंग की डिग्रियां तक करवाते हैं। ऐसे में राज्य के लाखों उम्मीदवार मुन्नाभाई बन रहे हैं। कुछ समय पूर्व सिरसा स्थित ऐसे ही एक संस्थान टाटा इंफोटैक के प्रबंधक के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था।





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