इंदौर. इंदौर के रीटेल बाजार और यहां देशी-विदेशी निवेश की संभावनाओं का जायजा लेने के लिए सांसदों का एक दल इंदौर में है। वह अपना काम शुरू करें इसके पहले उन्हें शहरवासी और उद्योगपति बताना चाहते हैं कि उन्हें इंदौर पर गौर क्यों करना चाहिए? केंद्र सरकार की नजरों से दूर यह शहर विकास के लिए उम्मीद करता है कि ये सांसद दिल्ली में जाकर इंदौर की वकालत करेंगे।
स्टैंडिंग पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन कॉमर्स के सदस्य मंगलवार को रीटेल मार्केट में घरेलू और विदेशी निवेश की संभावनाओं को तलाशने के लिए इंदौर के मॉल्स और रीटेल काउंटर्स का दौरा करेगा। 17 सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष डॉ. केशव राय हैं।
दल के सदस्य लोकसभा सांसद सी.के. चंद्रप्पन, शिशुपाल एन. पाटले, गिंगी एन. रामचंद्रन, ब्रजकिशोर त्रिपाठी, राज्यसभा सांसद मोहम्मद अमीन और दिनेश त्रिवेदी सोमवार शाम इंदौर पहुंच गए। दल के समन्वयक एसडीएम मनोज पुष्प ने बताया दल का दौरा इंदौर से शुरू हो रहा है। इसके बाद 23 फरवरी तक मुंबई, नासिक और चेन्नई में अध्ययन कर रिपोर्ट देगी जो पार्लियामेंट में रखी जाएगी।
इसलिए नजर में है इंदौर
दूसरी श्रेणी के भुवनेश्वर, कोचिन, रायपुर जैसे आठ शहरों में इंदौर का औद्योगिक विकास सबसे तेज हो रहा है।
इंदौर की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 120 हजार करोड़ के एमओयू साइन हुए थे जिसमें से 60 प्रतिशत से ज्यादा आसपास के लिए थे। खजुराहो और जबलपुर समिट में इससे आधे निवेश के ही करार हुए।
इंदौर के बाजार में 1 करोड़ वर्गफीट स्पेस की बुकिंग रीटेल सेक्टर के लिए हो चुकी है। कई मॉल्स आकार ले चुके हैं या तैयारी में है।
फिलहाल यहां 50 करोड़ का रीटेल मार्केट है, जिसमें सालाना 20 प्रतिशत वृद्धि हो रही है।
रिलायंस ने भी प्रदेश का सबसे बड़ा मॉल यहीं खोलने का निर्णय लिया है।
आईटी, एसईजेड के तहत पांच बड़ी कंपनियां, हाउसिंग सेक्टर में 600 एकड़ तक की कॉलोनी यहां आ रही है। इससे भी रीटेल बाजार को बढ़ावा मिलेगा।
हमसे सौतेला व्यवहार क्यों होता रहा
इंदौर के उद्योगपतियों और शहरवासियों को हमेशा से यह बात सालती रही है कि केंद्र सरकार ने सौतेला व्यवहार किया है। ‘भास्कर’ से चर्चा में उन्होंने 1870 से अब तक इंदौर और प्रदेश के साथ किए भेदभाव गिनाए।
सरकार की गलत और असहयोगपूर्ण नीतियों के कारण 1870 से चली आ रही कपड़ा मिलें बंद हुईं। फिर भी देशभर का 13 प्रतिशत कपड़ा पश्चिम मध्यप्रदेश (मालवा-निमाड़) से ही सप्लाय होता है।
सोयाबीन का सबसे ज्यादा उत्पादन होने के बाद भी फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री विकसित नहीं की गई। जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी सेक्टर में अवसर के बाद भी हमें मौका नहीं दिया गया।
केंद्र सरकार ने इंदौर से अहमदाबाद और जयपुर को जोड़ने वाले हाई-वे के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया।
रतलाम-खंडवा रेल लाइन को प्रदेश के अन्य शहरों से नहीं जोड़ा। इसका सबसे नकारात्मक असर इंदौर के उद्योगों पर पड़ा। 50 साल तक मांग के बाद इंदौर-गोधरा रेल लाइन मिली।
राजग सरकार के रहते घोषित स्वर्णिम चतुभरुज में आगरा-बॉम्बे रोड शामिल नहीं किया। अन्य कॉरिडोर में भी प्रदेश शामिल नहीं।
प्रदेश पर 16 प्रतिशत एक्साइज और 33 प्रतिशत इनकम टैक्स लगाने से अनेक उद्योग अन्य राज्यों में चले गए। इसमें मान ग्रुप और कृति प्रमुख हैं।
उद्योगपतियों ने कहा- पार्लियामेंट में हमारी बात भी रखें
इन्फ्रास्ट्रक्चर दें, कई गुना रिटर्न दूंगा
>> हमें केंद्र सरकार से कोई रियायत नहीं चाहिए। सिर्फ मुंबई, जयपुर और कांडला (व्हाया अहमदाबाद) सिक्सलेन रोड चाहिए। हमारा रीटेल बाजार ‘ज्यामीट्रिक’ अनुपात में विकास करेगा।
राजेंद्र कोठारी, रेसीडेंट डायरेक्टर, पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज
कनेक्टिविटी और जमीन दें
>> यहां एग्रीकल्चर, प्लास्टिक, सोयाबीन, इंजीनियरिंग, हार्डवेयर, लोहा व कपड़े का बड़ा बाजार है। यह सबकुछ हमने अपने बलबूते पर खड़ा किया है। पहली चीज कनेक्टिविटी और दूसरी जमीन चाहिए। उद्योगों के विस्तार के लिए केंद्र सरकार प्रदेश सरकार को जमीन मुहैया करवाने में मदद करे।
मनोहर झूरानी, मानद सचिव, इंडस्ट्रीज फाउडेंशन
असंगठित रीटेल मार्केट को तराशें
>> इंदौर में रीटेल मार्केट संगठित सेक्टर (मॉल) में बहुत कम हैं। असंगठित सेक्टर में रीटेल कारोबार ज्यादा हो रहा है। इसे बढ़ावा दें और टैक्स स्ट्रक्चर व्यवस्थित करें।
विनय कालानी, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज, मध्यप्रदेश