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आब-ए-जमजम के न पहुंचने से हाजियों में मायूसी

जांजगीर. हाजी मक्का-मदीना से लौटने के बाद काफी खुश थे। पर उनमें यात्रा के एक महीने बाद भी इस खुशी पर आब-ए-जमजम के न पहुंचने की मायूसी छाने लगी है। हाजियों के लिए जमजम का धार्मिक महत्व है।

नगर के हाजी मिर्जा रफीक बेग ने बताया कि पैसों की बचत व मेहनत के बाद उन्हंे अल्लाह की दुआ से हज जाना नसीब हुआ। जब वे वहां से जमजम लेकर लौट रहे थे, तब अरब हज कमेटी ने उनसे जमजम को वहां रुकवा कर बाद में भेजने की बात कही, पर अब तक जमजम उन तक नहीं पहुंचा।

रायपुर से जांजगीर अपने भाई सईद खान के यहां आए हाजी अब्दुल गफ्फार ने बताया कि जमजम के संबंध में उन्होंने कई बार छग हज कमेटी से संपर्क किया, पर कोई माकूल जवाब उन्हें नहीं मिला। अब उन्हें जमजम मिलने की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है, जिससे वे व उनके चाहने वाले दुखी हैं।

चांपा थानापारा निवासी हाजी मिर्जा अकबर बेग ने बताया कि हज से लौटने के बाद छग हज कमेटी का उन्हें एक पत्र मिला, जिसमें हज कमेटी के अच्छे क्रियाकलाप के लिए सिफारिश मांगी गई है। सिफारिशी पत्र में छग हज कमेटी की तारीफ में कसीदे गढ़े गए हैं, उन्हें पत्र में केवल हस्ताक्षर करना है। वे उसमें दस्तखत कर भी देते, आब-ए-जमजम अब तक उनके घर नहीं पहुंचने पर वे झूठी तारीफ नहीं कर पा रहे हैं।

क्या है आब-ए-जमजम
आब-ए-जमजम का अर्थ है उम्र बढ़ाने वाला जल। मान्यता के मुताबिक यह एक पवित्र जल है, जिस पर हाजियों सहित हर इस्मालिक व्यक्ति की धार्मिक आस्था है। उनके अनुसार इसे खड़े होकर पीने से दिल की सभी मुराद पूरी हो जाती है, और समस्त रोग दूर हो जाते हैं। जल की विशेषता के संबंध में उन्होने बताया कि लंबे समय तक रखने पर भी जल साफ-सुथरा व दोषरहित रहता है।

हाजी मिर्जा रफीक बेग ने बताया कि पूरे अरब रेगिस्तानी हैं व आब ए जमजम का स्त्रोत अकेला ऐसा स्त्रोत है जिसका प्रतिवर्ष पूरे मक्का के अलावा विश्व के 50 लाख हाजियों के द्वारा उपयोग किया जाता है। इसके अलावा हर हाजी वापसी में अपने साथ 10 लीटर जमजम ले जाता है। लेकिन इसके जल स्तर में कोई कमी नहीं होती। जल का स्वाद मीठा है, इसके अतिरिक्त अन्य जल स्त्रोतों का स्वाद खारा है।

धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार बीबी हाजिरा अपने बच्चे हजरत इस्माइल सफा व मरवा के बीच एक जगह लिटा, उनके लिए पानी खोज रही थी। पानी की खोज के दौरान बीच-बीच में अपने बच्चे से दूर होने पर वापस दौड़ कर उन्हें देखती रहती।

हजरत इस्माइल के पैरों की रगड़ से जल का स्त्रोत फूट पड़ा, पानी सीधे उनके मुंह तक पहुंचने लगा। पानी का स्त्रोत वर्तमान में आब-ए-जमजम कहलाता है। हज यात्रा में जाने वाले हाजी सफा व मरवा पहाड़ी के 7 चक्कर आज भी लगाते हैं।





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