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अंतरजातीय विवाह करने पर आरक्षण का लाभ नहीं

मुंबई. बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि अंतरजातीय विवाह के आधार पर कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या जनजाति को दिए जा रहे आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता है।

जाति का संबंध जन्म से : जस्टिस रंजना देसाई और रोशन दलवी की बेंच ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति को जाति आधारित आरक्षण देना, जो जन्म से पिछड़ी जाति का नहीं है, बल्कि उसने केवल पिछड़ी जाति में विवाह किया है, आरक्षण नीति को नाकाम करना है।

पहले मराठा, फिर कोली : याचिकाकर्ता हेमलता बाछव को दिसंबर 2003 में नासिक जिला परिषद में कनिष्ठ सहायक के पद पर नियुक्ति दी गई थी। यह पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था। हेमलता मराठा है, जबकि उसके पति महादेव कोली अनुसूचित जनजाति के हैं। हेमलता ने शादी के बाद ‘कोली’ होने का दावा किया था। दिसंबर 2006 में अनुसूचित जनजाति जांच समिति को जब यह पता चला कि हेमलता जन्म से कोली नहीं है तो उसकी नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।

सरकारी प्रस्तावों का हवाला : हेमलता ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अपने पक्ष में उसने 1959 और 1966 के पारित दो सरकारी प्रस्ताव पेश किए थे, जिसमें पिछड़ी जाति में उच्च जाति के लोगों के विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए रियायतों का प्रावधान था।

संविधान को धोखा : हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के बाद के फैसलों के कारण ये दोनों प्रस्ताव प्रासंगिक नहीं है। जजों ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि स्वेच्छा से अन्य जाति का वरण करके अनुसूचित जाति व जनजाति का दर्जा हासिल करना संविधान के साथ धोखाधड़ी होगी।





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pawan kumar mehra
Wednesday, 20th Feb 2008, 8:39
your paper is good and new is very fress now i would like to local historical chapter in your paper as about bikaner local public they leveing with bikaner boarn and many more