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Indians Abroad Indians Abroad लंदन.
ब्रिटिश सरकार ने माइग्रैंट्स की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्हें यहां की नागरिकता के लिए इंग्लिश लैंग्वेज के और ज्यादा टेस्ट देने होंगे। साथ ही वीजा फीस भी अधिक भरनी होगी। इस आशय की घोषणा ब्रिटेन की गृहमंत्री जैक स्मिथ ने बुधवार को पार्लियामेंट में की। उन्होंने कहा, इमिग्रैंट्स को काम करने और टैक्स भरने के अलावा ब्रिटिश सोसायटी को अपने योगदान का प्रदर्शन भी करना होगा।
उन्हें सोसायटी के प्रति अपनी इंटिग्रेशन को साबित करना होगा। हो सकता है कि कुछ माइग्रैंट पब्लिक सर्विसेज पर अतिरिक्त बोझ थोड़ा कम करने के लिए ट्रांजिसनल इम्पैक्ट फंड में योगदान कर पाएं लेकिन उन्हें कुछ अवधि के लिए प्रोबेशनरी सिटिजनशिप भी काटनी होगी।
कभी खत्म न होने वाला काम :
स्मिथ ने कहा कि लोगों को नागरिक बनना सिखाना ब्रिटिश माइग्रेशन सिस्टम का कभी न खत्म होने वाला काम रहा है। भविष्य के माइग्रैंट्स को नागरिकता हासिल करने की जरूरत होगी। मौजूदा सिस्टम का यही आधार है। उन्होंने कहा, नागरिकता के अधिकार और फायदे उनके लिए उपलब्ध होंगे जो हमारे मूल्यों से लगाव और कम्युनिटी को योगदान देने की इच्छा रखते हों।
यह स्वतंत्रता, सहिष्णुता, अवसरों और विविधता का देश है। इसे पाने और इसमें शामिल होने के लिए हमारी भाषा सीखनी होगी, कानून के मुताबिक चलना और अर्थव्यवस्था में योगदान करना होगा।
फंड और फीस अभी तय नहीं : ब्रिटिश सरकार को ट्रांजिशनल इम्पैक्ट फंड और इसकी फीसों को अभी निर्धारित करना है, लेकिन संकेत हैं कि सरकार इसमें 15 मिलियन पाउंड वार्षिक की वृद्धि कर सकती है। कानून तोड़ने वालों के लिए नागरिकता पाने की प्रक्रिया और कठिन हो सकती है। या फिर उन्हें ब्रिटिश नागरिक बनने से पूरी तरह रोका जा सकता है।