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महाकाल को चढ़ाई पूरी कमाई

उज्जैन .‘सबसे बड़ा रुपैया’ के इस जमाने में ऐसी मिसाल मिलनी मुश्किल है, जो उज्जैन में एक मिल मजदूर महिला ने पेश की है। इस बेसहारा वृद्धा लीलाबाई चौधरी (62) ने अपनी जिंदगी भर की दौलत (एक लाख इक्यावन हजार रुपए) महाकाल के चरणों में अर्पित कर दी।

यहां बहादुरगंज में अकेली रहने वाली लीलाबाई ने जब महाकाल मंदिर की ‘स्वर्ण शिखर योजना’ के लिए मुंबई के धनपतियों के साथ खड़े होकर उनके बराबर दान दिया तो वहां मौजूद जिला प्रभारी मंत्री बाबूलाल गौर व मंदिर समिति के पदाधिकारियों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।

जेवर भी बेच दिए

लीलाबाई ने बताया कि योजना के लिए न्यूनतम 1.51 लाख रुपए की दान राशि तय की गई थी। बैंक में रखा पैसा कम था, सो उन्होंने इसे पूरा करने के लिए अपने छह तोला सोने के जेवर भी बेच दिए।

महाकाल का साथ

लीलाबाई ने बताया कि उन्होंने पति के निधन के बाद छह माह के पुत्र की परवरिश के लिए 1973 से हीरा मिल में 30 साल तक मजदूरी की। बेटा शादी के बाद अलग रहने लगा। इसके बाद उनका महाकाल के अलावा कोई सहारा नहीं रहा। वे नियमित रूप से महाकाल के दर्शन को जाती हैं। लीलाबाई को इस बात की तनिक भी चिंता नहीं है कि उनका बेसहारा बुढ़ापा कैसे बीतेगा। वे पूरे विश्वास के साथ कहती हैं, ‘सब महाकाल संभालेगा।’





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amit nagar
Thursday, 21st Feb 2008, 15:18
she is realy great i think if all people have same think than no body sleep witout food or other behifit's i m proud to be an indian