जयपुर. राजस्थान विधान सभा में सत्ता पक्ष के नेताओं के व्यवहार व सदन में बोलने न देने पर प्रतिपक्ष के नेता हेमा राम चौधरी संसदीय सचिव नियुक्ति मुद्दे पर तीन दिन से बने गतिरोध से दुखी होकर रो पड़े।
सदन की नेता मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि तीन दिन से गतिरोध बना हुआ है राजस्थान की ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों की जनता भी हमें देख रही है। संसदीय सचिवों की नियुक्ति के मुद्दे पर अध्यक्ष द्वारा राज्य के महाअधिवक्ता द्वारा मांगी गई राय सदन के पटल पर रख दी गई है आप लोग इसे पढ़ लें। कांग्रेस के डा. सीपी जोशी ने कहा कि सदन संविधान कानून और परम्पराओं से चलता है।
आज जो राय आपने रखी वह इससे पहले क्यों नहीं रख दी। इसके बाद जैसे ही नेता प्रतिपक्ष हेमा राम चौधरी ने आसन से अनुमति लेकर बोलना शुरू किया कि अचानक मुख्यमंत्री ने कहा कि सीधे-सीधे बोलिए भूमिका बनाने की जरूरत नहीं है। चौधरी सदन की नेता के इस व्यवहार से भावुक होकर अपने स्थान पर बैठ गए और उनके आंख में आंसू आ गए। यह देखकर कांग्रेस के संयम लोढा ने कहा कि सदन की नेता प्रतिपक्ष से कैसा व्यवहार कर रही है। इसके साथ ही कांग्रेस सदस्य उत्तेजित होकर अध्यक्ष के आसन के समक्ष आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
बाद में चौधरी ने विधान सभा में अपने कक्ष में संवाददाताओं कहा कि संसदीय सचिवों के मुद्दे पर तीन दिन से जारी गतिरोध व सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा बोलने न दिए जाने के कारण मैं दुखी था, लेकिन बुधवार को सदन की नेता वसुंधरा राजे के व्यवहार से और ज्यादा दुखी होकर मैं रो पड़ा।
इधर संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड ने संवाददाताओं से कहा कि नेता प्रतिपक्ष अपनी पार्टी में चल रहीं आन्तरिक उठा-पटक से परेशान होकर रोए। राठौड ने राजस्थान विधान सभा के प्रेस कक्ष में संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत करते हुए कहा कि हम सभी नेता प्रतिपक्ष का सम्मान करते हैं। उनका व्यक्तित्व शुरू से ही भावुक रहा है।