जयपुर. वन विभाग के तबादलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी तबादले निरस्त होंगे। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री प्रतापसिंह सिंघवी ने बुधवार को पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मिलकर व्यक्तिगत सफाई दी और बाद में पत्र लिखकर तबादले निरस्त करने का अनुरोध किया।
भाजपा विधायक दल की मंगलवार को हुई बैठक में विधायक सांगसिंह भाटी, अनीता भदेल सहित कई विधायकों ने मुख्यमंत्री को तबादलों में पैसे लिए जाने की शिकायत की थी। अखबारों में यह मामला छपने के बाद मुख्यमंत्री ने सिंघवी को बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली थी। शाम को वन राज्य मंत्री की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में भी यह स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरण पारस्परिक, स्वैछिक एवं जनप्रतिनिधियों की अभिशंसा के आधार पर किए गए।
विभाग में 774 अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले किए गए थे। इनके साथ ही वर्कचार्ज कर्मचारियों में 217 कर्मचारियों के तबादले किए गए। सूत्रों के अनुसार तबादलों में विवाद इसलिए हुआ, क्योंकि सरिस्का और रणथम्भोर अभयारण्यों में 82 अधिकारियों व कर्मचारियों के उनकी इच्छा के विरुद्ध तबादले किए गए थे।
सब चाहते हैं जैसलमेर-बाड़मेर की ‘डेजर्ट’ फांकना
सामान्यतया जैसलमेर, बाड़मेर में कोई अधिकारी-कर्मचारी जाना नहीं चाहता। वन विभाग में मामला उल्टा है। यहां वन विभाग का लगभग हर अधिकारी रेगिस्तानी जिलों में ही लगना चाहता है। इसका कारण है डेजर्ट डवलपमेंट प्रोग्राम। इस योजना में पौधरोपण के लिए केन्द्र से काफी पैसा आता है।
‘तबादले निरस्त करने के निर्देश दिए हैं’
विधायक दल की बैठक में ऐसी कोई बात ही नहीं हुई थी। पता नहीं क्यों अखबारों में ऐसी खबर छपी है। जब मैं गलत नहीं हूं तो बदनामी क्यों मोल लूं। इसलिए मैंने सभी तबादले निरस्त करने के निर्देश दे दिए हैं।
-प्रतापसिंह सिंघवी, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री