जयपुर. जयपुर की बहुचर्चित पृथ्वीराज नगर आवासीय योजना की जमीन फिर से सरकारी हो गई है। राज्य सरकार ने बुधवार को पिछली सरकार के समय जारी की गई उस अधिसूचना को वापस ले लिया, जिसमें पृथ्वीराज नगर को अवाप्ति से मुक्त किया गया था। इसके साथ ही इलाके की कॉलोनियों को सरकारी जमीन मानकर नियमन करने का रास्ता साफ हो गया है।
नियमन के लिए बनी कटारिया कमेटी की सिफारिशों के आधार पर पृथ्वीराज नगर में नियमन की दरें सामान्य दर में 30 रुपए अतिरिक्त जोड़कर रखने का फैसला पहले ही किया जा चुका है। राज्य सरकार मंत्रिमंडल की बैठक में पहले ही यह फैसला कर चुकी है कि पृथ्वीराज नगर को सरकारी जमीन पर बसा हुआ मानते हुए नियमन कर दिया जाए। हाईकोर्ट में भी सरकार की ओर से यही मंशा जाहिर की गई है। यहां तक कि गैर अनुमोदित कॉलोनियों में विकास कार्य कराए जाने का फैसला भी किया जा चुका है।
अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार..
पृथ्वीराज नगर के नियमन के लिए अब केवल राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति का ही इंतजार है। सरकार के स्तर पर नियमन में आ रही लगभग सभी बाधाओं को दूर कर लिया गया है। इस मामले की सुनवाई अभी हाईकोर्ट में चल रही है।
नियमन का दस साल से है इंतजार..
पृथ्वीराज नगर की कॉलोनियों के नियमन के लिए स्थानीय निवासी एक दशक से भी ज्यादा समय से इंतजार कर रहे हैं। अपना आशियाना बचाने के लिए यहां के बाशिंदों ने तत्कालीन छात्र नेता प्रताप सिंह खाचरियावास के नेतृत्व में आंदोलन शुरू किया था।
फिर अवाप्त होगी खाली पड़ी जमीन..
कटारिया कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सरकार पहले ही यह फैसला कर चुकी है कि पृथ्वीराज नगर में खाली पड़ी जमीन को पुन: अवाप्त करके कब्जा लिया जाएगा। बदले में किसानों को 20 प्रतिशत आवासीय और 5 प्रतिशत व्यावसायिक जमीन मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
सात सौ कॉलोनियां, डेढ़ लाख लोग होंगे लाभान्वित
सांगानेर से लेकर कालवाड़ रोड तक करीब 30 किलोमीटर की लंबाई में फैले पृथ्वीराज नगर में सात सौ से ज्यादा कॉलोनियां हैं, जिनमें लगभग डेढ़ लाख लोग रह रहे हैं। नियमन होने से बड़े भू-माफियाओं को तो लाभ होगा ही, साथ ही डेढ़ लाख भूखंडधारी भी लाभान्वित होंगे।