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महल छोड़ मैदान में आईं गायत्री देवी

जयपुर. rajmata जयपुर राजघराने की जमीन से कब्जा हटाने के लिए आखिर राजमाता गायत्री देवी को ही महल छोड़कर मैदान में आना पड़ा है। मोतीडूंगरी किले के पीछे स्थित इस जमीन को बचाने के लिए राजमाता बुधवार को मौके पर दिए जा रहे धरने में पहुंच गईं और स्थानीय लोगों का अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान कर दिया। यह संभवत: पहला मौका है जब जमीन को बचाने के लिए पूर्व राजमाता धरने पर आईं।

करीब 18 हजार वर्गगज इस बेशकीमती जमीन पर एक सोसायटी ने भूखंड काटकर बेच दिए और अब यहां न्यायालय के स्टे के बावजूद बाउंड्रीवाल बनाने का काम चल रहा है। इस जमीन पर राजमाता जनता के लिए पार्क बनवाना चाहती हैं। इस जमीन के लिए स्थानीय लोग और गायत्री देवी लंबे समय से सरकार और प्रशासन से मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।

इससे आक्रोशित लोगों ने मंगलवार को मौके पर धरना शुरू कर दिया। राजमाता गायत्री देवी भी धरना स्थल पर पहुंच गईं और आधे घंटे तक वहीं बैठी रहीं। सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं करने से नाराज और दुखी नजर आ रही गायत्री देवी ने लोगों से ही जमीन बचाने के लिए पूरी ताकत लगाने की अपील की। उन्होंने स्थानीय लोगों से कहा कि वे कब्जा करने वालों को रोकें और अतिक्रमण को खुद हटा दें।

मुख्यमंत्री ने नहीं दिया ध्यान

गायत्री देवी ने धरने में बैठे लोगों से स्पष्ट कहा कि इस जमीन पर पार्क विकसित करने के लिए इसे राज्य सरकार को सुपुर्द कर दिया है। इसके बावजूद सरकार इस जमीन की सुरक्षा नहीं कर रही। भू-माफिया का कब्जा रोकने के लिए पिछले दिनों मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी पत्र लिखा था लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि मुख्यमंत्री इस मामले में कोई कार्रवाई करेंगी। अब वे फिर से पत्र लिखेंगी।

रजिस्ट्री से खरीदी थी जमीन

मीणा कॉलोनी गृह निर्माण सहकारी समिति के सचिव सुरेशचंद्र जैन ने दावा किया है कि यह जमीन सोसायटी ने महाराजा सवाई जयसिंह बेनीवोलेंट ट्रस्ट से 1982 में खरीदी थी। सोसायटी ने इस जमीन पर 61 भूखंड काटे और लोगों को बेच दिए। अब भूखंडधारी निर्माण करा रहे हैं तो इसमें गलत क्या है?





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