उज्जैन. महाकाल मंदिर स्वर्ण शिखर योजना का तांबा गायब होने के मामले की जांच में अब नया मोड़ आ गया है। मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक शुभकरण शर्मा की भूमिका शक के दायरे में आ गई है जिसके परिप्रेक्ष्य में पूछताछ की जरूरत महसूस होने पर उन्हें जांच कमेटी से हटा दिया गया है। अब सिर्फ दो सदस्यीय समिति ही आगे की जांच पूरी करेगी।
लिहाजा जांच पूरी होने में कम से कम दो दिन और लग सकते हैं। जांच कमेटी में श्री शर्मा भी सदस्य के रूप में शामिल थे। उनके अलावा प्रबंध समिति सदस्य व एडीएम उमाकांत पांडे व दिवाकर नातू इसके सदस्य बनाए गए थे। कमेटी को गायब तांबे की मात्रा के साथ लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने का जिम्मा सौंपा गया था।
हालांकि कमेटी के गठन वक्त ही प्रशासक को इसमें शामिल करने पर प्रoA चिह्न् लगाए गए थे। लोगों का कहना था उनके प्रशासक होते हुए तांबा गायब हुआ है और वे ही जांच कमेटी में सदस्य हैं, ऐसे में समिति निष्पक्ष जांच कैसे करेगी लेकिन बुधवार को प्रबंध समिति अध्यक्ष व कलेक्टर शिवशेखर शुक्ला ने श्री शर्मा को जांच कमेटी से दूर रखने के निर्णय पर मोहर लगा दी।
हालांकि जांच का अधिकतर हिस्सा पूरा हो गया है और यह तथ्य भी सामने आ गया है कि कितना तांबा गायब हुआ था। श्री शर्मा को जांच कमेटी से अलग करने की पुष्टि एडीएम व जांच कमेटी सदस्य श्री पांडे ने की है।
इसलिए हटाया : तांबा गायब होने के मामले में प्रशासक की भूमिका पर अंगुली उठी। कमेटी के बाकी सदस्यों ने यह महसूस किया कि प्रशासक से भी पूछताछ की जाना जरूरी है। इसके बारे में जब वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया तो उन्होंने भी इसकी सहमति दी।
अब ये होगा : कमेटी प्रशासक श्री शर्मा के भी बयान लेगी। जांच रिपोर्ट पर अब सिर्फ दो सदस्यों के ही हस्ताक्षर रहेंगे। यह संभावना भी बढ़ गई है कि इस मामले में लापरवाही को लेकर प्रशासक पर भी जिम्मेदारी तय हो सकती है।
अब तक ये हुआ : स्वर्ण शिखर योजना में उपयोग के लिए लाया गया तांबा गायब होने की जानकारी सामने आई लेकिन मंदिर प्रबंध समिति के पास रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि कितना तांबा चोरी गया था।
इसका पता लगाने के लिए मंदिर समिति अध्यक्ष ने जांच कमेटी बनाई। इसे जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए गए थे। कमेटी ने प्रबंध समिति कार्यालय के कर्मचारियों के बयान लिए और उस दुकानदार से भी जानकारी ली जिससे तांबा खरीदा गया था।