इंदौर. देश में गेहूं का उत्पादन पिछले साल से ज्यादा है और देशभर के वेअर हाउसों में भारी मात्रा में गेहूं स्टॉक भी अच्छा है, वहीं उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों गेहूं के समर्थन मूल्य में 250 रुपए की बढ़ोतरी कर 1000 रुपए तय कर दिया था।
1 मार्च से सरकारी गेहूं तुलने की भी उम्मीद है। हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को 1000 रुपए के अलावा 100 रुपए बोनस देने की घोषणा भी कर दी है। ऐसे में सरकार और किसानों को तो फायदा होगा लेकिन आम उपभोक्ताओं को महंगा गेहूं खाने पर विवश होना पड़ेगा।
जब सरकार ने मिल क्वालिटी गेहूं का मूल्य 1100 रुपए तय कर दिया है तो आम जनता का गेहूं 147 और लोकवन गेहूं का बाजार मूल्य 1200 से 1400 रुपए तक जाने की उम्मीद है।
दूसरी तरफ फ्लोर मिल इंडस्ट्रीज और गेहूं के छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि पहले राज्य में गेहूं अन्य राज्यों की अपेक्षा सस्ता था लेकिन अब प्रदेश में इसका मूल्य 1100 रुपए हो जाएगा जबकि यूपी, गुजरात में 1000 रुपए ही है। ऐसे में उन्हें नुकसान होगा।
इन राज्यों की फ्लोर मिलें गेहूं से बने उत्पाद अन्य राज्यों में प्रदेश से सस्ते दामों पर भेजेंगी। गेहूं के प्रमुख व्यापारी आनंद खंडेलवाल का कहना है कि प्रदेश में गेहूं से बने उत्पाद महंगे हो जाने से यहां की मिलें अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगी जिससे प्रदेश की फ्लोर मिल इंडस्ट्रीज के साथ ही कई छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान की उम्मीद है।
बजरंग आईल मिल के सुभाष गोयल का कहना है अगर अन्य राज्यों में गेहूं सस्ता होगा तो प्रदेश की ज्यादातर मिलों को नुकसान पहुंचेगा। अन्य राज्यों में भी गेहूं 1100 रुपए होता है तो प्रदेश की मिलें बराबर के साथ प्रतिस्पर्धा कर पाएंगी।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा होगा
प्रदेश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का करीब 10 लाख बोरी से ज्यादा पुराना गेहूं स्टॉक में है। वर्तमान भावों पर विदेशी कंपनियां माल नहीं बेच रही थीं लेकिन अब नए गेहूं का मूल्य 1100 रुपए हो जाने से विदेशी कंपनियों का पुराना गेहूं भी अच्छे दामों पर बिकेगा।