बीकानेर.
परिसीमन के कारण आगामी विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में बीकानेर का राजनीतिक परिदृश्य बदला हुआ नजर आएगा। इस बार कई क्षेत्रों में नए राजनीतिक समीकरण उभरेंगे। राजनेताओं ने अभी से अंदर ही अंदर तैयारी भी शुरू कर दी है। परिसीमन से बीकानेर को काफी फायदा हुआ है। पांच के बजाय अब जिले को सात विधायक मिलेंगे, जिससे विकास की गति बढ़ेगी। चुनाव के परिणाम चाहे जो रहें लेकिन विधायकों को मिलने वाले धन का उपयोग और भी बेहतर ढंग से हो सकेगा।
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। इस परिसीमन ने कई दिग्गज नेताओं के पसीने छुड़ा दिए हैं। सबसे अधिक मेहनत कांग्रेस के विधायक बी.डी.कल्ला को करनी होगी। प्रदेशाध्यक्ष पद से हटने के बाद कल्ला अपने क्षेत्र में पहले से अधिक सक्रिय नजर आने लगे हैं।
शहर भी दो भागों में बंट चुका है। कोलायत का शहरी क्षेत्र अलग करने से बीकानेर पूर्व नई सीट बन चुकी है। इसी प्रकार लूणकरणसर से खाजूवाला-पूगल को अलग करके नया विधानसभा क्षेत्र बनाया गया है। श्रीडूंगरगढ़ भी अब जाट बहुल हो गया है।
लोकसभा के लिए उम्मीदवारों की खोज
बीकानेर लोकसभा सीट सुरक्षित होने के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों में इस सीट के लिए उम्मीदवारों की खोजबीन शुरू कर दी है। लोकसभाध्यक्ष रह चुके मध्यप्रदेश के राज्यपाल बलराम जाखड़ जैसे कद्दावर नेता यहां से लोकसभा के सांसद बने थे। सुपर स्टार धर्मेन्द्र वर्तमान में भाजपा से सांसद हैं।
इसके अलावा पूर्व महाराजा स्व. करणीसिंह से लेकर, मनफूलसिंह भादू, स्व. महेन्द्रसिंह भाटी, कॉमरेड शोपतसिंह तक तथा वर्तमान में जिला प्रमुख रामेश्वर डूडी भी लोकसभा में बीकानेर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। सुरक्षित सीट होने के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों में यहां के लिए किसी कद्दावर नेता की खोजबीन शुरू हो गई है। लोकसभा के चुनाव 2009 में प्रस्तावित हैं, इसलिए राजनीतिक दलों के पास भी मंथन करने के लिए पूरा समय है।
पूरब में नई तलाश
बीकानेर पूर्व नई सीट बनने से शहर दो भागों में बंट गया है। कोलायत से शहर के भाग को अलग करके यह सीट बनाई गई है। इसमें अधिकांश बाहरी कॉलोनियां शामिल हैं, जहां सभी जाति वर्ग का मिश्रण है। बाहरी नेता यहां नजरें गड़ाए हुए हैं। कोलायत का शहरी क्षेत्र अलग होने के बाद भी विधायक देवीसिंह भाटी को सुरक्षित माना जा रहा है। भाटी की ग्रामीण क्षेत्र में भी पकड़ मजबूत है लेकिन उनकी इस बार चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा से कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
धर्मेन्द्र नहीं होंगे सांसद
परिसीमन के कारण बीकानेर लोकसभा सीट सुरक्षित होने से अब धर्मेन्द्र दुबारा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। भाजपा ने सुपर स्टार धर्मेन्द्र को बीकानेर से चुनाव लड़ाकर राजस्थान में काफी फायदा उठाया। धर्मेन्द्र के पुत्र सुपर स्टार सन्नी देओल तथा बोबी देओल का रोड शो यहां की जनता को देखने को मिला। हालांकि अब लोगों ने इसे मंथन का विषय बना दिया है कि बीकानेर को धर्मेन्द्र से क्या मिला? अब यह समय बताएगा कि आगामी चुनाव में इस सीट पर यहीं का कोई नेता खड़ा होगा या फिर राजनीतिक दल किसी बाहरी नामचीन चेहरे को मैदान में उतारेंगे।
कांटों भरी है कल्ला की राहें
नए परिदृश्य में बीकानेर शहर अब पश्चिम सीट बन चुकी है। कोलायत से शहर का एक बड़ा हिस्सा अलग करके उसे पूर्व नई सीट में बदला गया है। राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो पश्चिमी क्षेत्र में कोलायत का 30 प्रतिशत नया हिस्सा शामिल हुआ है, जिसमें सभी जाति वर्ग के लोग शामिल हैं। शहरी क्षेत्र पहले पुष्करणा बहुल होने के कारण उसी जाति के उम्मीदवार के लिए आसान सीट मानी जाती थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। इस सीट से पांच बार विधायक बनने वाले बी.डी.कल्ला को इस बार चुनाव में ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी।
लूणकरणसर हल्का, अब श्रीडूंगरगढ़ जाट बहुल
लूणकरणसर से अलग करके खाजूवाला-पूगल (सुरक्षित) नई सीट बन जाने से नोखा को इस बार सामान्य वर्ग का विधायक मिलेगा। नोखा से वर्तमान एमएलए संसदीय सचिव गोविन्द मेघवाल पूगल के निवासी हैं, इस कारण उनकी राहें इस नए क्षेत्र में आसान मानी जा रही हैं।
जबकि नोखा के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को टिकट हासिल करने के लिए जोर आजमाईश करनी पड़ेगी। परिसीमन के कारण नोखा के कुछ गांवों को श्रीडूंगरगढ़ में शामिल किया गया है। इससे श्रीडूंगरगढ़ अब जाट बहुल क्षेत्र बन गया है। कई जाट नेताओं की नजर भी इस सीट पर है।