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आदिवासियों के 33 लाख दबाए

दंतेवाड़ा. मालिक मकबूजा के तहत जिले के चार आदिवासियों को ट्रैक्टर और टिप्पर खरीदने के लिए दी गई 33 लाख रुपए से ज्यादा राशि के गबन का मामला सामने आया है। कलेक्टर के आदेश पर हुई जांच में पाया गया कि हितग्राहियों को सिर्फ 80 हजार रुपए देकर चलता कर दिया गया। बाकी 33 लाख रुपए से कुछ ज्यादा राशि गबन कर ली।

दंतेवाड़ा थाने के थानेदार टीएस चौहान ने बताया कि कलेक्टर दफ्तर से तीन दिन पहले पुलिस को शिकायत मिली है। हितग्राहियों के बयान के बाद एक-दो दिन के अंदर जुर्म कायम किया जाएगा। मालिक मकबूजा व्यवस्था के तहत आदिवासियों की जमीन से काटे गए पेड़ों को बेचकर मिली राशि उनके बैंक खाते में जमा कर दी जाती है।

राशि को जरूरत के मुताबिक कलेक्टर की अनुमति से आदिवासी को रिलीज किया जाता है। चार आदिवासियों ने ट्रेक्टर और टिप्पर खरीदने के लिए कलेक्टर शिशुपाल सोरी के पास आवेदन दिया था। कलेक्टर ने गीदम निवासी रामा और कोयना को हाइड्रालिक ट्रेक्टर खरीदने के लिए क्रमश: 4 लाख 72 हजार रुपए और 4 लाख 76 हजार रुपए मंजूर किए थे। राशि का डीडी जगदलपुर की फर्म विनोद महिंद्रा को दिया गया।

इसी तरह टिप्पर खरीदने देवाराम और मुक्का निवासी गीदम को क्रमश: 12 लाख 59 हजार और 12 लाख 16 हजार रुपए स्वीकृत किए गए। यह राशि उनके खाते से जायका आटो मोबाइल्स एवं फाइनेंस कंपनी जगदलपुर के खाते में जमा की गई। कुछ दिन पहले कलेक्टर से ये चारों हितग्राही मिले। उनका कहना था कि हाइड्रोलिक ट्रेक्टर और टिप्पर उनको अब तक नहीं मिले हैं।

मनोज नायर नामक व्यक्ति ने उनको कुछ राशि देकर बाकी पूरी राशि अपने पास रख ली है। राम को दो हजार रुपए और देवाराम को सबसे ज्यादा 72 हजार रुपए दिए गए। कलेक्टर ने वाहन सप्लाई करने वाली दोनों कंपनियों को पत्र भेजकर वाहन देने या भुगतान को लौटाने कहा। तय समय गुजर जाने के बाद भी हितग्राहियों को न वाहन मिले, न पैसा। पूरे मामले की जांच के बाद कलेक्टर ने मामला पुलिस को कार्रवाई के लिए सौंप दिया।





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